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दक्ष यज्ञ की कथा के प्रसंग को सुन भक्त हुए भाव-विभोर

By Ten News One Desk

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दक्ष यज्ञ की कथा के प्रसंग को सुन भक्त हुए भाव-विभोर


टेन न्यूज़ ii 17 फरवरी 2026 ii प्रभाष चन्द्र ब्यूरो, कन्नौज

संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में गौ सेवा गतिविधि के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वावधान में सेठ वासुदेव सहाय इंटर कॉलेज के खेल मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा अमृत वर्षा के तृतीय दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा वाचन कर रहीं साध्वी सत्यप्रभा गिरि ने शिव पुराण के अनुसार राजा दक्ष के यज्ञ का मार्मिक प्रसंग सुनाया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

साध्वी ने बताया कि राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान करने की भावना से उन्हें और माता सती को यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया। भगवान शिव के बार-बार मना करने के बावजूद जब माता सती अपने पिता के यज्ञ में पहुंचती हैं, तो वहां उनका घोर अपमान होता है। इस अपमान से आहत होकर माता सती आत्मदाह कर लेती हैं।

जब इस घटना की जानकारी भगवान शिव को उनके गणों से मिलती है, तो वे क्रोधित होकर वीरभद्र को प्रकट करते हैं, जो यज्ञ का विध्वंस कर देते हैं। बाद में देवताओं के समझाने पर भगवान शिव राजा दक्ष को बकरे का सिर लगाकर पुनः जीवनदान देते हैं और इस प्रकार यज्ञ की पूर्णाहुति होती है।

साध्वी ने कथा के माध्यम से संदेश दिया कि पति-पत्नी को एक-दूसरे की भावनाओं और वचनों का सम्मान करना चाहिए, जिससे परिवार और समाज में संतुलन बना रहे।

कथा को सफल बनाने में अजीत दोहरे, उमा कांत, नरेंद्र यादव, नीता पाठक, अमित दोहरे, प्रभास चंद, अन्नू दुबे और नयन दोहरे का विशेष सहयोग रहा।

दक्ष यज्ञ की कथा के प्रसंग को सुन भक्त हुए भाव-विभोर

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टेन न्यूज़ ii 17 फरवरी 2026 ii प्रभाष चन्द्र ब्यूरो, कन्नौज

संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में गौ सेवा गतिविधि के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वावधान में सेठ वासुदेव सहाय इंटर कॉलेज के खेल मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा अमृत वर्षा के तृतीय दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा वाचन कर रहीं साध्वी सत्यप्रभा गिरि ने शिव पुराण के अनुसार राजा दक्ष के यज्ञ का मार्मिक प्रसंग सुनाया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

साध्वी ने बताया कि राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान करने की भावना से उन्हें और माता सती को यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया। भगवान शिव के बार-बार मना करने के बावजूद जब माता सती अपने पिता के यज्ञ में पहुंचती हैं, तो वहां उनका घोर अपमान होता है। इस अपमान से आहत होकर माता सती आत्मदाह कर लेती हैं।

जब इस घटना की जानकारी भगवान शिव को उनके गणों से मिलती है, तो वे क्रोधित होकर वीरभद्र को प्रकट करते हैं, जो यज्ञ का विध्वंस कर देते हैं। बाद में देवताओं के समझाने पर भगवान शिव राजा दक्ष को बकरे का सिर लगाकर पुनः जीवनदान देते हैं और इस प्रकार यज्ञ की पूर्णाहुति होती है।

साध्वी ने कथा के माध्यम से संदेश दिया कि पति-पत्नी को एक-दूसरे की भावनाओं और वचनों का सम्मान करना चाहिए, जिससे परिवार और समाज में संतुलन बना रहे।

कथा को सफल बनाने में अजीत दोहरे, उमा कांत, नरेंद्र यादव, नीता पाठक, अमित दोहरे, प्रभास चंद, अन्नू दुबे और नयन दोहरे का विशेष सहयोग रहा।

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