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20 वर्ष संघर्ष करने के बाद जमीला को मिली वृद्धा पेंशन

By Ten News One Desk

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20 वर्ष संघर्ष करने के बाद जमीला को मिली वृद्धा पेंशन


टेन न्यूज़ !! १५ फरवरी २०२६ !! ब्यूरो चीफ रामजी पोरवाल, औरैया। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम जौरा विकास खण्ड औरैया की निवासी जमीला के पति का निधन लगभग बीस वर्ष पूर्व हो गया था। पति के निधन के बाद से ही जमीला निराश्रित जीवन व्यतीत कर रही थी। उन्होंने अनेक ग्राम प्रधानों को अपने दस्तावेज दिए, कई बार आवेदन किया, परंतु उन्हें वृद्धा पेंशन का लाभ नहीं मिल सका।

इस दौरान वह गांव के दलालों के मकड़जाल में भी फंसती रहीं, कई बार अनावश्यक धन खर्च किया, फिर भी पेंशन स्वीकृत नहीं हुई। वर्षों तक दर-दर भटकने के बाद भी उन्हें उनका अधिकार नहीं मिला। अपेक्षा महिला एवं बाल विकास समिति औरैया ने संकल्प लिया कि सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र और अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

संस्था द्वारा जमीला के दस्तावेज व्यवस्थित कराए गए, पुनः आवेदन कराया गया तथा संबंधित विभाग में लगातार पैरवी की गई। निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप अंततः जमीला के खाते में वृद्धा पेंशन की धनराशि प्राप्त हुई। पेंशन मिलने पर जमीला अत्यंत भावुक और प्रसन्न हुईं। अब वह अपने दैनिक आवश्यक खर्च इस पेंशन से स्वयं पूरा कर सकेंगी।

यह उदाहरण दर्शाता है कि यदि योजनाएं समय पर और पारदर्शिता के साथ संचालित हों, तो जमीला जैसी गरीब और बेसहारा महिलाओं को अपने अधिकार के लिए 20 वर्षों तक संघर्ष नहीं करना पड़े, जो जमीला के मामले ने एक बार फिर सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ाकर दिया है ll

20 वर्ष संघर्ष करने के बाद जमीला को मिली वृद्धा पेंशन

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20 वर्ष संघर्ष करने के बाद जमीला को मिली वृद्धा पेंशन


टेन न्यूज़ !! १५ फरवरी २०२६ !! ब्यूरो चीफ रामजी पोरवाल, औरैया। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम जौरा विकास खण्ड औरैया की निवासी जमीला के पति का निधन लगभग बीस वर्ष पूर्व हो गया था। पति के निधन के बाद से ही जमीला निराश्रित जीवन व्यतीत कर रही थी। उन्होंने अनेक ग्राम प्रधानों को अपने दस्तावेज दिए, कई बार आवेदन किया, परंतु उन्हें वृद्धा पेंशन का लाभ नहीं मिल सका।

इस दौरान वह गांव के दलालों के मकड़जाल में भी फंसती रहीं, कई बार अनावश्यक धन खर्च किया, फिर भी पेंशन स्वीकृत नहीं हुई। वर्षों तक दर-दर भटकने के बाद भी उन्हें उनका अधिकार नहीं मिला। अपेक्षा महिला एवं बाल विकास समिति औरैया ने संकल्प लिया कि सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र और अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

संस्था द्वारा जमीला के दस्तावेज व्यवस्थित कराए गए, पुनः आवेदन कराया गया तथा संबंधित विभाग में लगातार पैरवी की गई। निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप अंततः जमीला के खाते में वृद्धा पेंशन की धनराशि प्राप्त हुई। पेंशन मिलने पर जमीला अत्यंत भावुक और प्रसन्न हुईं। अब वह अपने दैनिक आवश्यक खर्च इस पेंशन से स्वयं पूरा कर सकेंगी।

यह उदाहरण दर्शाता है कि यदि योजनाएं समय पर और पारदर्शिता के साथ संचालित हों, तो जमीला जैसी गरीब और बेसहारा महिलाओं को अपने अधिकार के लिए 20 वर्षों तक संघर्ष नहीं करना पड़े, जो जमीला के मामले ने एक बार फिर सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ाकर दिया है ll

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