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दिव्यांशी ने अपने नगर का किया नाम रोशन पहले ही प्रयास में किया नीट क्वालीफाई

By Ten News One Desk

Published on:

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दिव्यांशी ने अपने नगर का किया नाम रोशन पहले ही प्रयास में किया नीट क्वालीफाई



टेन न्यूज़ !! १६ जून २०२५ !! अमुक सक्सेना, तिलहर/शाहजहांपुर


तिलहर के गाँव डभौरा निवासी स्वर्गीय लोचन लाल वर्मा की पौत्री दिव्यांशी वर्मा ने अपने पहले ही प्रयास में नीट परीक्षा में शानादार सफलता प्राप्त कर नगर का नाम किया रोशन है। दिव्यांशी ने 577 अंक पाकर आल इंडिया रैंक 3983 आई है। जो दिव्यांशी और उनके परिवार के लिये एक बड़ी उपलब्धि है।

दिव्यांशी के पिता राजीव कुमार वर्मा नगर के आरबीएम इंटर कालेज में सहायक अध्यापक है, तो वही उनकी माँ भी बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक है। दिव्यांशी का कहना है कि उनकी सफलता उनके दादा स्वर्गीय लोचन लाल वर्मा की याद दिलाती है, जो खुद एक शिक्षक थे। साथ ही एक सरल, और समाज में सम्मानित व्यक्ति व व्यक्तित्व के इंसान थे! वे हमेशा शिक्षा के महत्व को मानते थे और चाहते थे कि परिवार के बच्चे आगे बढ़ें, हमें विश्वास है कि वे जहां भी होंगे, मेरी इस सफलता पर बहुत खुश और गौरवांवित होंगे।

मेरी यह सफलता केवल मेरी नहीं, बल्कि मेरे दादा का आशीर्वाद, पिता के मार्गदर्शन और पूरे परिवार और हमारे अपनो के सहयोग का परिणाम है।

दिव्यांशी ने अपने नगर का किया नाम रोशन पहले ही प्रयास में किया नीट क्वालीफाई

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टेन न्यूज़ !! १६ जून २०२५ !! अमुक सक्सेना, तिलहर/शाहजहांपुर


तिलहर के गाँव डभौरा निवासी स्वर्गीय लोचन लाल वर्मा की पौत्री दिव्यांशी वर्मा ने अपने पहले ही प्रयास में नीट परीक्षा में शानादार सफलता प्राप्त कर नगर का नाम किया रोशन है। दिव्यांशी ने 577 अंक पाकर आल इंडिया रैंक 3983 आई है। जो दिव्यांशी और उनके परिवार के लिये एक बड़ी उपलब्धि है।

दिव्यांशी के पिता राजीव कुमार वर्मा नगर के आरबीएम इंटर कालेज में सहायक अध्यापक है, तो वही उनकी माँ भी बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक है। दिव्यांशी का कहना है कि उनकी सफलता उनके दादा स्वर्गीय लोचन लाल वर्मा की याद दिलाती है, जो खुद एक शिक्षक थे। साथ ही एक सरल, और समाज में सम्मानित व्यक्ति व व्यक्तित्व के इंसान थे! वे हमेशा शिक्षा के महत्व को मानते थे और चाहते थे कि परिवार के बच्चे आगे बढ़ें, हमें विश्वास है कि वे जहां भी होंगे, मेरी इस सफलता पर बहुत खुश और गौरवांवित होंगे।

मेरी यह सफलता केवल मेरी नहीं, बल्कि मेरे दादा का आशीर्वाद, पिता के मार्गदर्शन और पूरे परिवार और हमारे अपनो के सहयोग का परिणाम है।

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