Shahjahanpur में जीएसटी की फर्जी फर्म बनाकर 2 करोड़ की कर चोरी का खुलासा, चार गिरफ्तार
रोजा थाना पुलिस, एसओजी व सर्विलांस सेल की संयुक्त कार्रवाई
टेन न्यूज़ ii 14 फरवरी 2026 ii डीपी सिंह, डेस्क न्यूज़,
शाहजहाँपुर
थाना रोजा, जनपदीय एसओजी, सर्विलांस सेल एवं गैंगस्टर सेल की संयुक्त पुलिस टीम ने जीएसटी की बोगस फर्म बनाकर लगभग दो करोड़ रुपये की कर चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने अटसलिया पुल के पास से चार अभियुक्तों को फर्जी दस्तावेज, ई-वे बिल, बिल्टी बुक, मोबाइल फोन व एक सफेद मारुति फ्रॉन्क्स कार सहित गिरफ्तार किया।
ऐसे करता था गिरोह फर्जीवाड़ा
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह सोशल मीडिया के माध्यम से भोले-भाले लोगों को नौकरी का झांसा देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो प्राप्त करता था। इन दस्तावेजों पर कूटरचित हस्ताक्षर कर फर्जी जीएसटी फर्मों का पंजीकरण कराया जाता था। बाद में इन्हीं फर्मों के नाम से फर्जी ई-वे बिल और बिल्टी तैयार कर गोरखपुर, कुशीनगर, आजमगढ़, महाराजगंज आदि जनपदों से स्क्रैप खरीदकर मुजफ्फरनगर में अवैध रूप से बेच दिया जाता था। फर्जी लेन-देन दिखाकर सरकार को कर का बड़ा नुकसान पहुंचाया जा रहा था।
पहले भी पकड़ी गई थीं गाड़ियां
दिनांक 28/29 नवंबर 2025 को मोहम्मदी रोड पर जीएसटी सचल दल द्वारा चेकिंग के दौरान तीन वाहनों को फर्जी दस्तावेजों सहित पकड़ा गया था। इस मामले में थाना रोजा पर मुकदमा संख्या 640/2025 धारा 318(2)/318(4)/336(3)/338/340(2) बीएनएस व धारा 132 जीएसटी अधिनियम के तहत अभियोग दर्ज किया गया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एसआईटी गठित की गई।
14 फरवरी को हुई गिरफ्तारी
14 फरवरी 2026 को मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने अटसलिया पुल से पहले घेराबंदी कर दिल्ली की ओर से आ रही मारुति फ्रॉन्क्स कार (DL 07 CY 4616) को रोका। कार में सवार चार आरोपियों को सुबह 7:04 बजे गिरफ्तार किया गया। तलाशी में 6 एंड्रॉयड फोन, एक कीपैड फोन, 10 बिल्टी बुक, दो रजिस्टर तथा फर्जी ई-वे बिल बरामद हुए।
गिरफ्तार अभियुक्त
अखिलेश पुत्र अशोक कुमार (मूल निवासी रायबरेली, हाल पता दिल्ली)
विपिन पुत्र नक्षत्रपाल सिंह (मूल निवासी बदायूँ, हाल निवासी गाजियाबाद)
शिवओम शर्मा उर्फ सुमित (मुजफ्फरनगर)
राहुल राणा (शामली)
विपिन के विरुद्ध पूर्व में गाजियाबाद में चोरी व शस्त्र अधिनियम के मुकदमे दर्ज हैं।
पूछताछ में बड़ा खुलासा
अभियुक्तों ने बताया कि “ब्रदर्स लॉजिस्टिक” नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर वे फर्जी दस्तावेज चालकों को भेजते थे। विपिन फर्जी बिल्टी पर हस्ताक्षर करता था, राहुल ई-वे बिल तैयार कराता था, जबकि सुमित गाड़ियों के नंबर उपलब्ध कराता था। अखिलेश व विपिन चालकों को जीएसटी चेकिंग के समय और रूट की जानकारी देते थे।
गिरोह अब तक 200 से 250 स्क्रैप गाड़ियां फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से पास करा चुका है। अवैध कमाई से खरीदी गई कार भी बरामद की गई है।
पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई शुरू कर दी है तथा मामले की विस्तृत जांच जारी है।






