सत्य भारती स्कूल भोजपुर में शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में छात्रों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर शिक्षकों के प्रति जताया आभार![]()
टेन न्यूज ।। 12 सितंबर 2026 ।। डीपी सिंह, डेस्क न्यूज, मीरानपुर कटरा/शाहजहांपुर
सत्य भारती स्कूल भोजपुर में शिक्षक दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने विभिन्न रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में छात्रों ने कहा कि शिक्षक समाज की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
छात्रा पल्लवी ने अपने भाषण में कहा कि शिक्षक उस मोमबत्ती के समान होते हैं, जो स्वयं जलकर दूसरों को रोशनी प्रदान करते हैं। प्रियांशु गंगवार ने गुरु के ज्ञान को अनमोल खजाना बताते हुए शिक्षकों को नमन किया। सृष्टि सिंह, अरनव सिंह, कोमल, दिव्यांश, रश्मि और रेशमी सहित अन्य छात्रों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में शाहजहांपुर से आए क्लस्टर कोऑर्डिनेटर पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक और छात्र का रिश्ता अत्यंत पवित्र होता है। छात्र की सफलता ही शिक्षक की सबसे बड़ी गुरुदक्षिणा और कमाई होती है। उन्होंने शिक्षकों को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की शिक्षक शपथ दिलाई।
शपथ के माध्यम से शिक्षकों को विद्यार्थियों के व्यवहार, व्यक्तित्व और समग्र विकास पर ध्यान देने, उनमें अपनत्व की भावना विकसित करने तथा शिक्षा को केवल पढ़ाने तक सीमित न रखने का संकल्प दिलाया गया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए समर्पित रहने की प्रतिबद्धता जताई।
हेड टीचर कृष्ण कुमार ने बताया कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था। वह महान शिक्षाविद, दार्शनिक और भारत के द्वितीय राष्ट्रपति थे। उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कुम्हार मिट्टी को आकार देकर सुंदर बर्तन बनाता है, उसी प्रकार शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन को तराशकर उन्हें अच्छा इंसान और योग्य नागरिक बनाते हैं।
इस अवसर पर सहायक अध्यापक शिवम वर्मा, रेखा रानी, करुणा देवी, रश्मि और सीमा देवी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने छात्रों से मेहनत और लगन से पढ़ाई कर देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबों का ज्ञान या रटने तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे संस्कार और चरित्र का निर्माण करना भी है।