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पीलीभीत में मतदाता सूची विवाद ने पकड़ा तूल, दो एसडीएम समेत तीन पर एफआईआर के बाद नए आरोप

ByTen News One Desk

Oct 25, 2026
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पीलीभीत में मतदाता सूची विवाद ने पकड़ा तूल, दो एसडीएम समेत तीन पर एफआईआर के बाद नए आरोप


कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार का दावा—मतदाताओं से फॉर्म-8 पर हस्ताक्षर और पहचान पत्र लिए जा रहे, पुराने बदलावों को लेकर उठे सवाल


पीलीभीत। जनपद में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मामला अब नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। मतदाता सूची में नाम और अन्य विवरणों में बदलाव को लेकर विवाद के बीच दो उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) समेत तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। अब कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने आरोप लगाया है कि जिन मतदाताओं के नाम या विवरण कथित तौर पर बदले गए थे, उनसे फॉर्म-8 पर हस्ताक्षर और पहचान पत्र लिए जा रहे हैं। नेता का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए पुराने बदलावों को गलती बताकर रिकॉर्ड तैयार करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, इन नए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाए गए थे कि कई मतदाताओं के रिकॉर्ड में बदलाव किए गए, कुछ लोगों के नाम हटाए गए और कुछ ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए, जो संबंधित क्षेत्र के निवासी नहीं थे।

कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी संबंधित मतदाताओं से फॉर्म-8 पर हस्ताक्षर और पहचान पत्र लिए जा रहे हैं। उनका दावा है कि इससे पुराने बदलावों को त्रुटि बताने के लिए दस्तावेज तैयार किए जा सकते हैं।

हालांकि, फॉर्म-8 मतदाता सूची में नाम, पते या अन्य विवरणों में सुधार तथा निर्धारित परिस्थितियों में अन्य बदलावों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला आधिकारिक प्रपत्र है। केवल इस फॉर्म पर हस्ताक्षर या पहचान पत्र लिए जाने से किसी अनियमितता की पुष्टि नहीं होती। इस प्रक्रिया का उद्देश्य और वैधता संबंधित रिकॉर्ड तथा परिस्थितियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

जांच और प्रशासनिक जवाब पर टिकी निगाहें

24 अक्टूबर को मतदेय स्थलों पर विशेष अभियान से संबंधित प्रेस नोट के बाद यह नया आरोप सामने आने की बात कही गई है। फिलहाल पूरे मामले में कांग्रेस के आरोपों, एफआईआर में दर्ज तथ्यों और प्रशासनिक जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर स्पष्ट होना जरूरी है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन फॉर्म-8 से संबंधित प्रक्रिया पर क्या स्पष्टीकरण देता है और मतदाता सूची में कथित बदलावों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

रिपोर्ट: रामचंद्र सक्सेना, जिला ब्यूरो चीफ, टेन न्यूज़, पीलीभीत

 

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