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नोएडा में गणपति बप्पा के आने की तैयारी पूर्ण उत्साह के साथ, पर्यावरण को ध्यान में रखकर इको फ्रेंडली गणपति की स्थापना

ByTen News One Desk

Sep 2, 2024
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नोएडा में गणपति बप्पा के आने की तैयारी पूर्ण उत्साह के साथ, पर्यावरण को ध्यान में रखकर इको फ्रेंडली गणपति की स्थापना



टेन न्यूज़ !! 02 सितम्बर २०२४ !! गीता बाजपेई ब्यूरो,नोएडा


इस बार गणेश चतुर्थी भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी यानी 7 सितंबर को मनाई जाएगी। शहर में त्यौहार को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर में मंदिर के साथ कई सोसायटियों और कॉलोनियों में जगह-जगह खूबसूरत पंडाल सजाए जा रहे हैं। कई जगह पर बड़े-बड़े आयोजन होने की भी खबर.

गणेश चतुर्थी पर ज्यादातर जगहों पर मिट्टी से बनी इको-फ्रेंडली मूर्तियां स्थापित की जाएंगी। कई सोसायटियों में तीन से चार दिनों तक भगवान गणेश का भव्य उत्सव मनाया जाएगा। वहीं, मूर्ति विसर्जन के लिए सोसायटी परिसर में व्यवस्था की जाएगी। मराठी समाज की ओर से सिटी पार्क के पास गणेश उत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमें महाराष्ट्र के कलाकार हिस्सा लेंगे।

बाजार गणपति बप्पा की मूर्तियों से प्रकाशित हो रहे

सेक्टर-19 के बीएसएनएल चौराहे और सेक्टर-55 के बाजार गणपति बप्पा की मूर्तियों से सुसज्जित हो रहे हैं। गणपति बप्पा की मूर्ति बनाने के लिए अच्छी मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। मूर्तिकारों का दावा है कि ये मूर्तियां महज 15 मिनट में पानी में घुल जाएंगी। मूर्तियां बनाने का काम पिछले तीन महीने से चल रहा है। मूर्ति बाजारों में एक से सात फीट की मूर्तियां भी उपलब्ध हैं।

चमकीले रंगों से सजे गणपति

सेक्टर-20 में गणपति की मूर्तियों को भव्य रूप दिया जा रहा है। कई जगहों पर मूर्तियां बनकर तैयार हो गई हैं तो कई जगहों पर यह काम अंतिम चरण में है। कुछ दिनों बाद हर घर में भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी। मूर्तिकार दीपक बताते हैं कि हम इन मूर्तियों के लिए नियॉन रंगों का इस्तेमाल करते हैं। यह रंग अपने आप में खास है। एक तो इनकी चमक आंखों को नुकसान नहीं पहुंचाती। दूसरे ये रंग मूर्तियों को बेहद खूबसूरत बनाते हैं।

सेक्टर-20 के पास मूर्तिकार उमेश ने बताया कि वह चार महीने पहले से ही मूर्तियां तैयार करने की तैयारी शुरू कर देते हैं। इसके लिए सबसे पहले प्लास्टर ऑफ पेरिस और अच्छी मिट्टी से मूर्तियां बनाई जाती हैं। सूखने के बाद उन पर रंग किया जाता है। उसके बाद मूर्ति पर जरी और आर्टिफिशियल हीरे, पत्थर या मोती आदि लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास एक से साढ़े सात फीट तक की मूर्तियां उपलब्ध हैं। जबकि, बड़ी मूर्ति बनवाने के लिए पहले से ऑर्डर देना पड़ता है।

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