ज्ञान और वैराग्य से श्रेष्ठ भक्ति हैं: आचार्य श्याम जी
टेन न्यूज ii 08 अप्रैल 2026 ii ब्यूरो चीफ रामजी पोरवाल
औरैया। जनपद के अजीतमल क्षेत्र अंतर्गत ग्राम हैदरपुर में पक्का तालाब पर चल रही साप्ताहिक श्रीमद्व भागवत कथा के दौरान आचार्य श्याम जी ने बताया कि भक्ति के आगे ज्ञान व वैराग्य सब शून्य है ।
उन्होंने कहा कि व्रन्दावन में ज्ञान व वैराग्य सब बेकार है वह भक्ति की महत्ता हैं, वहा सभी भक्ति राधे राधे का उच्चारण करते हैं,
श्रद्धालुओं से संबोधन में कहा कि ज्ञान, वैराग्य और आस्था की त्रिवेणी ही श्रीमद्भागवत कथा का मूल सार है।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन का प्रमुख उद्देश्य ईश्वर भक्ति होना चाहिए, किन्तु भौतिकता के बढ़ते प्रभाव के कारण मनुष्य माया के जाल में फंसता जा रहा है, जो उसके पतन का मुख्य कारण बनता है।
आचार्य श्याम जी ने कथा के माध्यम से समझाया कि जब मनुष्य अनाचार, दुर्गुण और व्यभिचार जैसे अवगुणों में लिप्त हो जाता है, तो वह ‘धुंधकारी’ के समान हो जाता है।
वहीं, जब वही मनुष्य भक्ति,पूजा- पाठ और समाज सेवा के मार्ग पर चलता है, तो वह ‘गोकर्ण’ के रूप में श्रेष्ठ जीवन की ओर अग्रसर होता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागते हुए आत्मिक शांति को भूलता जा रहा है, जबकि वास्तविक शांति केवल ईश्वर के चरणों में ही प्राप्त होती है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर भजन-कीर्तन में लीन रहे। अगले प्रसंग में उन्होंने कहा कि इस कथा की महत्ता यह है कि जीव का आना व जाना समाप्त तभी होगा जब जीव यह अमर कथा का श्रवण करता हैं ।
इस दौरान सत्यकुमार पांडेय ,मधु सिंह सेंगर ,गोविन्द सिंह ,सुनील मिश्रा ,राकेश मिश्रा ,काव्यांश त्रिपाठी , देवांश त्रिपाठी ,राधव त्रिपाठी बल्लू दुबे आदि श्रद्धालुओ ने कथा का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
