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लगातार बारिश से अन्नदाता की फसलें हुई बर्बाद धान के खेतों में भरा पानी किसान बेहाल

By Ten News One Desk

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लगातार बारिश से अन्नदाता की फसलें हुई बर्बाद धान के खेतों में भरा पानी किसान बेहाल



टेन न्यूज़ !! ०२ नवम्बर २०२५ !! ब्यूरो चीफ रामजी पोरवाल, औरैया।


जनपद में लगातार तीन दिनों से रुक-रुक कर हो रही झमाझम बारिश ने अन्नदाता किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी फसलें जहां पानी के बोझ से लहलहाते पौधों समेत धराशायी हो गईं, वहीं जो फसलें किसान काटकर सुखाने के लिए खेतों में रखे थे, वे भी पानी में डूबकर सड़ने लगी हैं।

खेतों में भरे पानी से अब केवल कीचड़ और बर्बादी का मंजर नजर आ रहा है। अजीतमल क्षेत्र अंतर्गत भीखेपुर,जैनपुर गांव के किसान उमाशंकर निषाद, दीपक, लाखन सिंह और रूपरानी ने बताया कि खेतों में अब पानी का सैलाब फैला हुआ है। धान, अरहर, बाजरा और सब्जियों की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। किसानों के चेहरे पर मायूसी और बेबसी साफ झलक रही है।

जिन्होंने सालभर मेहनत, पसीना और पूंजी लगाकर फसल तैयार की थी, अब वे अपने खेतों को देखकर केवल आंसू बहा रहे हैं। किसान श्याम सिंह बताते हैं कि उन्होंने कुछ हिस्से की फसल की कटाई शुरू कर दी थी, लेकिन अचानक हुई लगातार बारिश ने सारी मेहनत मिट्टी में मिला दी। कई जगह फसलें पूरी तरह गिर चुकी हैं और खेतों में भरे पानी से कटे हुए दाने सड़ने लगे हैं।

किसानों का कहना है कि अगर जल्द मौसम में सुधार नहीं हुआ और खेतों से पानी की निकासी नहीं की गई, तो उनकी पूरी सालभर की मेहनत व्यर्थ हो जाएगी। वहीं, कृषि विभाग के अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन अब तक किसी प्रकार के मुआवजे या राहत की घोषणा न होने से किसानों में आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ गई है।

किसानों की गुहार है कि सरकार शीघ्र सर्वे कराकर उन्हें उचित मुआवजा दिलाए, ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें और जीवन की गाड़ी फिर से पटरी पर ला सकें। “खेत में पड़ी डूबी फसल हमारे दर्द की गवाही दे रही है,”-कहते हैं गांव के किसान, जिनकी मेहनत और उम्मीदें इस बारिश में बह गईं। अब सबकी निगाहें आसमान की ओर टिकी हैं।

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टेन न्यूज़ !! ०२ नवम्बर २०२५ !! ब्यूरो चीफ रामजी पोरवाल, औरैया।


जनपद में लगातार तीन दिनों से रुक-रुक कर हो रही झमाझम बारिश ने अन्नदाता किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी फसलें जहां पानी के बोझ से लहलहाते पौधों समेत धराशायी हो गईं, वहीं जो फसलें किसान काटकर सुखाने के लिए खेतों में रखे थे, वे भी पानी में डूबकर सड़ने लगी हैं।

खेतों में भरे पानी से अब केवल कीचड़ और बर्बादी का मंजर नजर आ रहा है। अजीतमल क्षेत्र अंतर्गत भीखेपुर,जैनपुर गांव के किसान उमाशंकर निषाद, दीपक, लाखन सिंह और रूपरानी ने बताया कि खेतों में अब पानी का सैलाब फैला हुआ है। धान, अरहर, बाजरा और सब्जियों की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। किसानों के चेहरे पर मायूसी और बेबसी साफ झलक रही है।

जिन्होंने सालभर मेहनत, पसीना और पूंजी लगाकर फसल तैयार की थी, अब वे अपने खेतों को देखकर केवल आंसू बहा रहे हैं। किसान श्याम सिंह बताते हैं कि उन्होंने कुछ हिस्से की फसल की कटाई शुरू कर दी थी, लेकिन अचानक हुई लगातार बारिश ने सारी मेहनत मिट्टी में मिला दी। कई जगह फसलें पूरी तरह गिर चुकी हैं और खेतों में भरे पानी से कटे हुए दाने सड़ने लगे हैं।

किसानों का कहना है कि अगर जल्द मौसम में सुधार नहीं हुआ और खेतों से पानी की निकासी नहीं की गई, तो उनकी पूरी सालभर की मेहनत व्यर्थ हो जाएगी। वहीं, कृषि विभाग के अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन अब तक किसी प्रकार के मुआवजे या राहत की घोषणा न होने से किसानों में आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ गई है।

किसानों की गुहार है कि सरकार शीघ्र सर्वे कराकर उन्हें उचित मुआवजा दिलाए, ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें और जीवन की गाड़ी फिर से पटरी पर ला सकें। “खेत में पड़ी डूबी फसल हमारे दर्द की गवाही दे रही है,”-कहते हैं गांव के किसान, जिनकी मेहनत और उम्मीदें इस बारिश में बह गईं। अब सबकी निगाहें आसमान की ओर टिकी हैं।

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