अवैध खनन की खबर वायरल करना पत्रकार को पड़ा भारी, मिली भगत से पुलिस ने पत्रकार को भेजा जेल, पत्नी ने एसपी से कार्यवाही की मांग
पत्रकार की पत्नी ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र: देकर लगाई न्याय की गुहार,
थाना अध्यक्ष पर अवैध खनन संरक्षण और फर्जी FIR का सनसनीखेज आरोप, परिवार को सुरक्षा की गुहार
टेन न्यूज़ !! ०१ नवम्बर २०२५ !! ब्यूरो चीफ रामजी पोरवाल ,औरैया
जनपद के थाना फफूंद क्षेत्र में पुलिस की कथित मिलीभगत से चल रहे अवैध खनन की खबरें सोशल मीडिया पर उजागर करने वाले स्थानीय पत्रकार आकाश बाबू अब खुद पुलिसिया प्रतिशोध का शिकार बन गए। पीड़ित की पत्नी सारुल ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर थाना अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं, आरोप है कि NCR पर जानबूझकर कार्रवाई न करना, झूठी FIR दर्ज करना, फर्जी GD एंट्री बनाना और दबंगों को संरक्षण देकर परिवार को हिंसा के हवाले छोड़ना। पत्र में दावा किया गया है, कि थाना अध्यक्ष की व्यक्तिगत दुश्मनी ही इन सबकी जड़ है, क्योंकि आकाश बाबू ने X (पूर्व ट्विटर) पर थाना अध्यक्ष के नाम से अवैध खनन की वीडियो-फोटो वाली पोस्ट्स वायरल की थी।
आरोप, 01, पहली शिकायत पर खामोशी, दूसरी मारपीट का खुला आमंत्रण
पत्र के अनुसार, 21 अक्टूबर 2025 को आकाश बाबू के छोटे भाई ने नगला पाठक गांव के तीन दबंगों के खिलाफ शराब पीकर मारपीट की NCR दर्ज कराई। थाना पुलिस द्वारा न तो कोई जांच की, और न ही CrPC की धारा 107/116 के तहत शांति भंग की आशंका में बंध किया। नतीजा? महज दो दिन बाद, 23 अक्टूबर को दबंग द्वारिकापुर गांव में घुस आए और आकाश के भाई अभिषेक के साथ गाली-गलौज, धमकी और मारपीट की। सारुल का आरोप है कि पुलिस की निष्क्रियता ने अपराधियों के हौसले बढ़ाए, जिससे दूसरी हिंसा हुई।
आरोप, 02, झूठी FIR और GD: कोर्ट को गुमराह करने की साजिश?
दूसरी घटना पर दर्ज मुकदमा संख्या 404/2025 में पुलिस ने उलटा खेल खेला। FIR में लिखा गया कि “आकाश बाबू और उनके भाई ने पूर्व में पीड़ित के घर पर हमला किया था” और इसका प्रार्थना पत्र थाने में दिया गया था। लेकिन सारुल ने दावा किया कि थाने में ऐसा कोई पूर्व शिकायत कभी दर्ज नहीं हुई – यह सरासर झूठ है।
इतना ही नहीं, GD एंट्री (23 अक्टूबर, रात 11 बजे) में दर्ज है कि “पीड़ित को PRD जवान मुकेश बाबू के साथ CHC दिबियापुर मेडिकल के लिए भेजा गया”। हकीकत? CHC के रिकॉर्ड में कोई एंट्री नहीं! पत्र में इसे जांच अधिकारी की न्यायालय को धोखा देने की सुनियोजित कोशिश बताया गया।
आरोप, 03, मूल वजह: अवैध खनन की खबर से थाना अध्यक्ष की रंजिश
सारुल ने पत्र में खुलासा किया कि उनके पति आकाश बाबू (पेशे से पत्रकार) X ( ट्यूटर ) प्लेटफॉर्म पर थाना फफूंद क्षेत्र में पुलिस संरक्षण वाली अवैध खनन की लगातार खबरें चला रहे थे। वीडियो, फोटो और तथ्यों वाली पोस्ट्स में थाना अध्यक्ष का नाम और उनकी कथित संलिप्तता का जिक्र था। इन पोस्ट्स के स्क्रीनशॉट संलग्न हैं। आरोप है कि इसी से क्रोधित थाना अध्यक्ष ने बदले की भावना से NCR को ठंडे बस्ते में डालकर, दबंगों को क्लीन चिट दे दी और झूठे मुकदमे में पत्रकार परिवार को फंसाया।
पत्र में थाना अध्यक्ष पर BNS की धारा 224, 243+246, 236+246 का उल्लंघन, कर्तव्य की अवहेलना, पक्षपात और शक्ति के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं।
प्रार्थना पत्र में निलंबन, FIR, सुरक्षा और 15 दिन में रिपोर्ट
सारुल ने SP से मांग की है कि
●थाना अध्यक्ष के खिलाफ तत्काल विभागीय जांच।
●दोषी साबित होने पर निलंबन, पदावनति या दंड।
●23 अक्टूबर की घटना पर तुरंत FIR।
●परिवार को पुलिस गश्त/गनर से सुरक्षा।
●15 दिनों में जांच प्रगति रिपोर्ट।
पत्रकार उत्पीड़न का बड़ा सवाल
यह मामला प्रेस की आजादी और पुलिस जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा। अवैध खनन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार को, यदि पुलिस ही निशाना बनाएगी तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहां सुरक्षित है? स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, फफूंद क्षेत्र में अवैध खनन लंबे समय से विवादास्पद है, और पुलिस की भूमिका पर पहले भी उंगलियां उठी ।मामले की गूंज लखनऊ तक पहुंचेगी। साथ ही पत्रकार संगठनों ने भी शासन प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग शुरू कर दी है।







