कटरा में कुल शरीफ के साथ उर्से कलीमी का शानदार समापन, जायरीन की भारी भीड़ से गुलजार रहा खानकाह परिसर
टेन न्यूज़ ii 01 अप्रैल 2026 ii पप्पू अंसारी, मीरानपुर कटरा (शाहजहांपुर)।
खानकाहे हुसैनिया कलीमिया में आयोजित पाँच दिवसीय उर्से कलीमी का समापन कुल शरीफ की रस्म के साथ अकीदत और एहतराम के माहौल में सम्पन्न हो गया। उर्स के अंतिम दिन देशभर से आए जायरीन की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा खानकाह परिसर और आसपास की सड़कें श्रद्धालुओं से खचाखच भर गईं।
मशहूर सूफी संत हज़रत सैय्यद मुहम्मद हुसैन उर्फ दूल्हा मियाँ और मसरूरे मिल्लत ताजुल उरफा हज़रत सैय्यद मसरूर अहमद कलीमी रहमतुल्लाहि तआला अलैहि के सालाना उर्स में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर अपनी श्रद्धा अर्पित की। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह नमाज़-ए-फज्र के बाद कुरआन ख्वानी से हुई, जिसके पश्चात सुबह 10 बजे कुल शरीफ अदा किया गया।
इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए मशाइख और सज्जादानशीनों ने महफिल में शिरकत कर दुआओं में हिस्सा लिया।
महफिल-ए-समा में मशहूर कव्वालों ने अल्लामा रूमी, अमीर खुसरो, हाफिज शीराजी और बेदम शाह वारसी के कलाम पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया। इसके बाद मुफ़्ती इकरामुल हक कलीमी ने खानदाने चिश्त का शजरा पेश किया।
खानकाह के सज्जादानशीन हज़रत सैय्यद मसऊद अहमद कलीमी की सरपरस्ती में कुल की रस्म अदा की गई। अपने बयान में उन्होंने कहा कि औलिया-ए-किराम की तालीम इंसानियत, मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम देती है, जिसे अपनाकर समाज में अमन और सौहार्द को मजबूत किया जा सकता है।
दिनभर जायरीन द्वारा मजारात पर हाजिरी, फातेहा ख्वानी और गुलपोशी का सिलसिला जारी रहा। खानकाह का खास तबर्रुक ‘कौढ़िया’ भी अकीदतमंदों में तकसीम किया गया। अंत में मुल्क में अमन-ओ-अमान और खुशहाली की दुआओं के साथ उर्स का भव्य समापन
