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कोटा बैराज से छोड़ा गया पानी यमुना,चंबल नदियों में बाढ़ जैसे हालत

By Ten News One Desk

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कोटा बैराज से छोड़ा गया पानी यमुना,चंबल नदियों में बाढ़ जैसे हालत



टेन न्यूज़ !! २८ जून २०२५ !! ब्यूरो चीफ रामजी पोरवाल, औरैया।


मध्य प्रदेश और राजस्थान में हो रही लगातार बारिश से कोटा बैराज का जलस्तर बढ़ गया है। कोटा बैराज से 56 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से औरैया जिले में यमुना, चंबल नदी उफान पर है, दोनों नदियों का जल स्तर लगातार बढ़ने से आसपास रहने वाले लोगों की चिंताएं भी बढ़ने लगी है। पिछले 30 घंटे में चंबल नदी के जलस्तर में आठ से नौ मीटर की बढ़ोतरी हुई है तो वही यमुना नदी में 3 से लेकर 4 मीटर की बढ़ोत्तरी हुई है। बुधवार दोपहर बाद तक चंबल का जलस्तर 113.57 मीटर पर पहुंच गया था।

कोटा बैराज से बीते शनिवार को पांच-पांच फीट के दो दरवाजे खोलकर 56 हजार क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया था। इसके चलते बुधवार को चंबल का जलस्तर 105.14 से बढ़कर दोपहर बाद तक 113.57 मीटर हो गया। हालांकि चेतावनी का निशान 119.80 मीटर और खतरे का निशान 120.80 मीटर है। चंबल के उफनाते ही यमुना नदी के जल स्तर में बढ़ोत्तरी हुई।

बाढ़ की आशंका से प्रशासन ने भी नदी के किनारे स्थित गांवों में निगरानी बढ़ा दी है। इस सम्बन्ध में उपजिलाधिकारी निखिल राजपूत ने बताया कि चंबल में पानी बढ़ने से यमुना का जलस्तर कुछ बढ़ा है यमुना के किनारे बसे गॉव के लोगो को सतर्क रहने तथा तहसील के अधिकारियो एवं कर्मचारियो को क्षेत्र मे नजर बनाये रखने के आदेश दिये गये है।

चंबल, यमुना के बढ़ते जलस्तर से 11 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है जिसको लेकर प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है, कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद इटावा जिले में भी चंबल नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

राजस्थान के कोटा से निकली चंबल नदी इटावा के भरेह में यमुना नदी में मिलती है। चंबल में पानी बढ़ने से यमुना नदी भी उफान पर आ रही है। तहसील प्रशासन ने तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया है। साथ ही लोगों को नदी किनारे न जाने की सलाह दी गई है। बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने राहत चौकी की स्थापना की है।

क्षेत्र के बडेरा, सिकरोड़ी, गोहानी कला, गोहानी खुर्द, असेबटा, ततारपुर कलां, गूंज, जुहीखा, बीजलपुर और खेरा डंडा गांव बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं। बरसात के मौसम में राजस्थान और मध्य प्रदेश में बारिश होते ही कोटा बैराज से पानी छोड़ा जाता है, जिससे नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है।

कोटा बैराज से छोड़ा गया पानी यमुना,चंबल नदियों में बाढ़ जैसे हालत

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टेन न्यूज़ !! २८ जून २०२५ !! ब्यूरो चीफ रामजी पोरवाल, औरैया।


मध्य प्रदेश और राजस्थान में हो रही लगातार बारिश से कोटा बैराज का जलस्तर बढ़ गया है। कोटा बैराज से 56 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से औरैया जिले में यमुना, चंबल नदी उफान पर है, दोनों नदियों का जल स्तर लगातार बढ़ने से आसपास रहने वाले लोगों की चिंताएं भी बढ़ने लगी है। पिछले 30 घंटे में चंबल नदी के जलस्तर में आठ से नौ मीटर की बढ़ोतरी हुई है तो वही यमुना नदी में 3 से लेकर 4 मीटर की बढ़ोत्तरी हुई है। बुधवार दोपहर बाद तक चंबल का जलस्तर 113.57 मीटर पर पहुंच गया था।

कोटा बैराज से बीते शनिवार को पांच-पांच फीट के दो दरवाजे खोलकर 56 हजार क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया था। इसके चलते बुधवार को चंबल का जलस्तर 105.14 से बढ़कर दोपहर बाद तक 113.57 मीटर हो गया। हालांकि चेतावनी का निशान 119.80 मीटर और खतरे का निशान 120.80 मीटर है। चंबल के उफनाते ही यमुना नदी के जल स्तर में बढ़ोत्तरी हुई।

बाढ़ की आशंका से प्रशासन ने भी नदी के किनारे स्थित गांवों में निगरानी बढ़ा दी है। इस सम्बन्ध में उपजिलाधिकारी निखिल राजपूत ने बताया कि चंबल में पानी बढ़ने से यमुना का जलस्तर कुछ बढ़ा है यमुना के किनारे बसे गॉव के लोगो को सतर्क रहने तथा तहसील के अधिकारियो एवं कर्मचारियो को क्षेत्र मे नजर बनाये रखने के आदेश दिये गये है।

चंबल, यमुना के बढ़ते जलस्तर से 11 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है जिसको लेकर प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है, कोटा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद इटावा जिले में भी चंबल नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

राजस्थान के कोटा से निकली चंबल नदी इटावा के भरेह में यमुना नदी में मिलती है। चंबल में पानी बढ़ने से यमुना नदी भी उफान पर आ रही है। तहसील प्रशासन ने तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया है। साथ ही लोगों को नदी किनारे न जाने की सलाह दी गई है। बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने राहत चौकी की स्थापना की है।

क्षेत्र के बडेरा, सिकरोड़ी, गोहानी कला, गोहानी खुर्द, असेबटा, ततारपुर कलां, गूंज, जुहीखा, बीजलपुर और खेरा डंडा गांव बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं। बरसात के मौसम में राजस्थान और मध्य प्रदेश में बारिश होते ही कोटा बैराज से पानी छोड़ा जाता है, जिससे नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है।

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