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तिलहर में वाटरकूलर मशीन घोटाले की आहट! 1 करोड़ 20 लाख के बजट पर उठे सवाल

By Ten News One Desk

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तिलहर में वाटरकूलर मशीन घोटाले की आहट! 1 करोड़ 20 लाख के बजट पर उठे सवाल


टेन न्यूज़ !! ०३ सितम्बर २०२५ !! अमुक सक्सेना, तिलहर/शाहजहाँपुर।


तिलहर नगर पालिका क्षेत्र में नगरवासियों की प्यास बुझाने के नाम पर करोड़ों का खेल होने की आशंका जताई जा रही है। नगर पालिका द्वारा नगर में लगभग 30 वाटरकूलर मशीनें (शीतल जल प्याऊ) लगवाई गई हैं। बताया जा रहा है कि इस परियोजना पर लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपये से अधिक का बजट खर्च हुआ है। लेकिन मशीनों की वास्तविक कीमत और तय मूल्य में भारी अंतर होने से नगरभर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार में एक वाटरकूलर मशीन की कीमत लगभग 90 हजार से 1 लाख रुपये तक होती है, जबकि पालिका द्वारा प्रति मशीन की कीमत 3 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। यानी हर मशीन पर लगभग 2 लाख रुपये का अंतर दिखाई दे रहा है। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर यह पैसा गया कहां?

नगरवासियों का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में बड़े स्तर पर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार हुआ है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो करोड़ों का घोटाला सामने आ सकता है। वहीं नगर में लगाए गए कुछ वाटरकूलर मशीनें सही ढंग से काम भी नहीं कर रही हैं। कई जगह पर मशीनें चालू अवस्था में ही नहीं मिल रही, जिससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर नगरवासियों को सुविधा देने के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा क्यों बर्बाद किया गया।

सूत्रों के मुताबिक, नगर पालिका में लंबे समय से टेंडरों और सप्लाई के नाम पर गड़बड़झाले की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन इस बार पानी पिलाने की परियोजना में ही ‘झोल’ सामने आने से लोगों में आक्रोश है। नगर के कई जिम्मेदार नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

लोगों का कहना है कि पारदर्शिता की बात करने वाली पालिका को इस मामले में जल्द ही स्पष्ट करना चाहिए कि एक मशीन की कीमत 3 लाख से अधिक क्यों दिखाई जा रही है, जबकि बाजार मूल्य इससे काफी कम है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो मामला और तूल पकड़ सकता है।

नगर में फिलहाल यह मुद्दा सबसे बड़ी बहस का कारण बना हुआ है।

तिलहर में वाटरकूलर मशीन घोटाले की आहट! 1 करोड़ 20 लाख के बजट पर उठे सवाल

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टेन न्यूज़ !! ०३ सितम्बर २०२५ !! अमुक सक्सेना, तिलहर/शाहजहाँपुर।


तिलहर नगर पालिका क्षेत्र में नगरवासियों की प्यास बुझाने के नाम पर करोड़ों का खेल होने की आशंका जताई जा रही है। नगर पालिका द्वारा नगर में लगभग 30 वाटरकूलर मशीनें (शीतल जल प्याऊ) लगवाई गई हैं। बताया जा रहा है कि इस परियोजना पर लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपये से अधिक का बजट खर्च हुआ है। लेकिन मशीनों की वास्तविक कीमत और तय मूल्य में भारी अंतर होने से नगरभर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार में एक वाटरकूलर मशीन की कीमत लगभग 90 हजार से 1 लाख रुपये तक होती है, जबकि पालिका द्वारा प्रति मशीन की कीमत 3 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। यानी हर मशीन पर लगभग 2 लाख रुपये का अंतर दिखाई दे रहा है। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर यह पैसा गया कहां?

नगरवासियों का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में बड़े स्तर पर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार हुआ है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो करोड़ों का घोटाला सामने आ सकता है। वहीं नगर में लगाए गए कुछ वाटरकूलर मशीनें सही ढंग से काम भी नहीं कर रही हैं। कई जगह पर मशीनें चालू अवस्था में ही नहीं मिल रही, जिससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर नगरवासियों को सुविधा देने के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा क्यों बर्बाद किया गया।

सूत्रों के मुताबिक, नगर पालिका में लंबे समय से टेंडरों और सप्लाई के नाम पर गड़बड़झाले की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन इस बार पानी पिलाने की परियोजना में ही ‘झोल’ सामने आने से लोगों में आक्रोश है। नगर के कई जिम्मेदार नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

लोगों का कहना है कि पारदर्शिता की बात करने वाली पालिका को इस मामले में जल्द ही स्पष्ट करना चाहिए कि एक मशीन की कीमत 3 लाख से अधिक क्यों दिखाई जा रही है, जबकि बाजार मूल्य इससे काफी कम है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो मामला और तूल पकड़ सकता है।

नगर में फिलहाल यह मुद्दा सबसे बड़ी बहस का कारण बना हुआ है।

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