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पत्रकारों के सब्र का टूटा बांध प्रेस कॉन्फ्रेंस का किया बहिष्कार सत्ता की देरी और सवालों के घेरे में व्यवस्था

ByTen News One Desk

Jan 14, 2026
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पत्रकारों के सब्र का टूटा बांध प्रेस कॉन्फ्रेंस का किया बहिष्कार सत्ता की देरी और सवालों के घेरे में व्यवस्था


लगभग आधा सैंकड़ा पत्रकारों ने किया प्रेस कॉन्फ्रेंस का किया बहिष्कार, विपक्ष ने उठाए लोकतांत्रिक जवाबदेही पर सवाल


टेन न्यूज़ ii 14 जनवरी 2026 ii ब्यूरो चीफ रामजी पोरवाल, औरैया
औरैया में प्रशासनिक कार्यशैली और सत्ता के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

आखिर शासन, प्रशासन लोकतंत्र को दबाकर क्यों घोंट रहा गला, आखिर क्यों बनाया जा रहा पत्रकारों को कठपुतली सोमवार को तय कार्यक्रम के अनुसार सुबह 11:30 प्रभारी मंत्री प्रतिभा शुक्ला की प्रेस कॉन्फ्रेंस, होनी थी, मगर उनका आगमन दोपहर लगभग 1:20 बजे हुआ।

लगभग दो घंटे की इस देरी के दौरान सभागार में मौजूद पत्रकार लगातार प्रतीक्षा करते रहे, परंतु स्थिति स्पष्ट न होने और समय बीतने के साथ पत्रकारों की एक बड़ी लॉबी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार कर दिया।

पत्रकारों का कहना है कि बैठक में मनरेगा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सवाल-जवाब प्रस्तावित थे। खासतौर पर योजना का नाम बदले जाने के बाद भी ज़मीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव को लेकर चर्चा होनी थी।

वी बी-ग्राम-जी से जुड़े आयोजन की जानकारी पहले से दी गई थी और इसी कारण पत्रकारों को सुबह 11 : 30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए बुला लिया गया था। देरी को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाती रहीं।

कुछ पत्रकारों का मानना है कि संभावित गंभीर सवालों की आहट के चलते कार्यक्रम में विलंब हुआ, जबकि आधिकारिक स्तर पर देरी के कारणों को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया। इस बीच विपक्ष ने पूरे प्रकरण को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सर्वेश बाबू गौतम ने बयान जारी करते हुए कहा कि मौजूदा सत्ता हर स्तर पर खुद को सफल मान रही है, इसी वजह से वह सवालों का सामना करने से बचती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई देरी ने संदेह को जन्म दिया है और यह स्थिति लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए शुभ संकेत नहीं है।

पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर जनपद में शासनिक कार्यशैली, पत्रकारों के सम्मान और जनहित से जुड़े मुद्दों को केंद्र में ला दिया है।

फिलहाल, इस देरी और बहिष्कार पर सभी की निगाहें आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं-क्योंकि सवाल अब सिर्फ समय का नहीं, लोकतंत्र को जवाबदेही का भी है।

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