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ब्रह्म विचार मेले में हुआ यज्ञ आयोजन, वेद मार्ग पर चलने का किया आह्वान

By Ten News One Desk

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ब्रह्म विचार मेले में हुआ यज्ञ आयोजन, वेद मार्ग पर चलने का किया आह्वान


टेन न्यूज़ ii 23 मार्च 2026 ii अमुक सक्सेना
तिलहर, शाहजहाँपुर। क्षेत्र के गांव चांदापुर में आयोजित ब्रह्र्म विचार मेले के दौरान आर्य उपप्रतिनिधि सभा के तत्वाधान में वैदिक विधि से यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने वैदिक परंपराओं और विचारों पर प्रकाश डालते हुए लोगों से वेद मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन और उनके विचारों को विस्तार से रखा।

बताया गया कि अप्रैल 1877 में चांदापुर में ईसाई और मुस्लिम विद्वानों के साथ हुए ऐतिहासिक शास्त्रार्थ में स्वामी दयानंद सरस्वती ने वैदिक सिद्धांतों के आधार पर अपने विचारों को मजबूती से प्रस्तुत किया, जिसमें अन्य मत तर्क और युक्ति की कसौटी पर खरे नहीं उतर सके।

सभा के जिला मंत्री वीरेंद्र कुमार आर्य ने जानकारी देते हुए बताया कि 19 व 20 अप्रैल 1877 को हुए इस शास्त्रार्थ में देवबंद मदरसे के मौलवी मोहम्मद कासिम, दिल्ली के मौलवी सैयद अब्दुल मंसूर तथा ईसाई पक्ष से पादरी स्काट और पादरी पारकर शामिल हुए थे।

पांच प्रमुख विषयों पर हुए इस शास्त्रार्थ में परमेश्वर, सृष्टि, ईश्वर की प्रकृति, धर्मग्रंथों की प्रमाणिकता और मुक्ति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

वक्ताओं ने कहा कि इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष चांदापुर में ब्रह्म विचार मेले का आयोजन किया जाता है, जिससे लोगों को वैदिक ज्ञान और परंपराओं से जोड़ने का कार्य किया जाता है।

कार्यक्रम के दौरान भुवनेश आर्य, गिरीश चंद्र श्रीवास्तव, संजय गुप्ता, नरेंद्र मिड्ढा, विनोद बाजपेई, वीरेंद्र कुमार आर्य, गोपाल स्वरूप, मंगली लाल, लेखराम, रजनीश कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

ब्रह्म विचार मेले में हुआ यज्ञ आयोजन, वेद मार्ग पर चलने का किया आह्वान

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टेन न्यूज़ ii 23 मार्च 2026 ii अमुक सक्सेना
तिलहर, शाहजहाँपुर। क्षेत्र के गांव चांदापुर में आयोजित ब्रह्र्म विचार मेले के दौरान आर्य उपप्रतिनिधि सभा के तत्वाधान में वैदिक विधि से यज्ञ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने वैदिक परंपराओं और विचारों पर प्रकाश डालते हुए लोगों से वेद मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन और उनके विचारों को विस्तार से रखा।

बताया गया कि अप्रैल 1877 में चांदापुर में ईसाई और मुस्लिम विद्वानों के साथ हुए ऐतिहासिक शास्त्रार्थ में स्वामी दयानंद सरस्वती ने वैदिक सिद्धांतों के आधार पर अपने विचारों को मजबूती से प्रस्तुत किया, जिसमें अन्य मत तर्क और युक्ति की कसौटी पर खरे नहीं उतर सके।

सभा के जिला मंत्री वीरेंद्र कुमार आर्य ने जानकारी देते हुए बताया कि 19 व 20 अप्रैल 1877 को हुए इस शास्त्रार्थ में देवबंद मदरसे के मौलवी मोहम्मद कासिम, दिल्ली के मौलवी सैयद अब्दुल मंसूर तथा ईसाई पक्ष से पादरी स्काट और पादरी पारकर शामिल हुए थे।

पांच प्रमुख विषयों पर हुए इस शास्त्रार्थ में परमेश्वर, सृष्टि, ईश्वर की प्रकृति, धर्मग्रंथों की प्रमाणिकता और मुक्ति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

वक्ताओं ने कहा कि इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष चांदापुर में ब्रह्म विचार मेले का आयोजन किया जाता है, जिससे लोगों को वैदिक ज्ञान और परंपराओं से जोड़ने का कार्य किया जाता है।

कार्यक्रम के दौरान भुवनेश आर्य, गिरीश चंद्र श्रीवास्तव, संजय गुप्ता, नरेंद्र मिड्ढा, विनोद बाजपेई, वीरेंद्र कुमार आर्य, गोपाल स्वरूप, मंगली लाल, लेखराम, रजनीश कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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