उर्से कलीमी के चौथे दिन ताजुल उरफ़ा कॉन्फ्रेंस में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब
टेन न्यूज ।। 01 अप्रैल 2026 ।। पप्पू अंसारी
मीरानपुर कटरा (शाहजहाँपुर)।
खानकाहे हुसैनिया कलीमिया में जारी पाँच रोज़ा उर्से कलीमी के चौथे दिन रूहानियत और इल्मी माहौल के बीच “ताजुल उरफ़ा कॉन्फ्रेंस” का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत नमाज़-ए-फज्र के बाद कुरआन ख्वानी से हुई, जबकि असर की नमाज़ के बाद सज्जादानशीन हज़रत सैयद मसऊद अहमद कलीमी साहब की सरपरस्ती में कॉन्फ्रेंस का आगाज़ तिलावत-ए-क़ुरआन से हुआ। संचालन मुफ़्ती शब्बीर अहमद ने किया।
कॉन्फ्रेंस में देशभर से आए उलेमा-ए-किराम, मशायख और सज्जादानशीनों ने शिरकत कर माहौल को इल्मी और रूहानी बना दिया।
प्रमुख हस्तियों में कलीयर शरीफ के हज़रत शाह अली मंजर एजाज़ कुद्दूसी साबरी, रुदौली शरीफ के हज़रत मोहम्मद आरिफ अहमद अहमदी (सुब्बू मियां), दरगाह खुरमा शरीफ रामपुर के सैयद फाहद मियां और रजबपुर के ख्वाजा सलीम फरीदी शामिल रहे। साथ ही बड़ी संख्या में अइम्मा, छात्र, बुद्धिजीवी, प्रोफेसर, डॉक्टर और अकीदतमंद मौजूद रहे।
उलेमा ने अपने खिताब में कहा कि खानकाहें हमेशा से इल्म, तालीम और भाईचारे का केंद्र रही हैं और आज के दौर में इनकी अहमियत और बढ़ गई है। उन्होंने समाज में अमन, मोहब्बत और इंसानियत को बढ़ावा देने का संदेश दिया।
इस दौरान मदरसा अलजामियतुल चिश्तिया से फारिग होने वाले छात्रों की दस्तारबंदी भी की गई। सज्जादानशीन हज़रत सैयद मसऊद अहमद कलीमी साहब ने अपने हाथों से पगड़ी बांधकर छात्रों को दुआओं से नवाज़ा, जबकि शिक्षकों ने सनदें प्रदान कीं।
सज्जादानशीन ने अपने बयान में कहा कि खानकाहें सिर्फ इबादत की जगह नहीं, बल्कि इंसानियत को जोड़ने वाले मरकज़ हैं, जहां से मोहब्बत, इल्म और अच्छे अखलाक का पैगाम पूरी दुनिया में फैलता है।
शाम को नात व मनकबत और रात में महफिल-ए-समा (कव्वाली) ने माहौल को रूहानी रंग में रंग दिया, जिसमें मशहूर कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश कर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
उर्स प्रभारी डॉ. सैयद असद अहमद कलीमी ने बताया कि 1 अप्रैल को सुबह 10 बजे कुल शरीफ और शाम को नमाज़-ए-मगरिब के बाद संदल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी।






