महोबा से अधिकारी की कर्तव्य के प्रति निष्ठा एवम् सादगी की मिसाल का एक अलग ही मामला आया सामने

टेन न्यूज़ !! 12 जुलाई २०२६ !! रिपोर्ट _राहुल विश्वकर्मा ब्यूरो, महोबा
जिले के जमीन के रिकॉर्ड में 35 साल पुरानी एक गलती ने दो किसानों की परेशानी बढ़ाई हुई थी। ये किसान जमीन से जुड़ी सेवाओं और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे थे। कुलपहाड़ के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट आदेश सिंह सागर ने एक अनोखा प्रशासनिक तरीका अपनाकर इस मामले को सुलझाया।
इससे लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचा जा सका। एसडीएम आदेश सिंह सागर ने पाया कि मामला मालिकाना हक के विवाद का नहीं, बल्कि पहचान अधूरी होने का था। उन्होंने तथ्यों की जांच का आदेश दिया, जिससे आखिरकार रेवेन्यू रिकॉर्ड में सुधार हो सका।
जमीन के रिकॉर्ड की समस्या वर्ष 1991 में हुए एक रजिस्टर्ड सेल डीड से शुरू हुई थी। खरीदारों के पूरे नाम प्रकाश शर्मा और राजविशाल थे। सेल डीड दस्तावेज में उनके नाम केवल प्रकाश और विशाल दर्ज किए गए। रेवेन्यू रिकॉर्ड में भी यही अधूरे नाम दर्ज हो गए, जबकि उनके आधार कार्ड में सही नाम लिखे थे।
इस गड़बड़ी की वजह से दोनों किसान भाई सही खतौनी हासिल नहीं कर पा रहे थे। इस गड़बड़ी के कारण ये किसान रजिस्ट्रेशन, म्यूटेशन, जमीन का लेन-देन या सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले पा रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक दशक में कई बार गुहार लगाने के बावजूद यह मामला करीब 35 साल से अनसुलझा पड़ा था। कोई भी इसे सुलझाने पर ध्यान नहीं दे रहा था।
एसडीएम आदेश सिंह सागर का इस मामले में कहना है कि रेक्टिफिकेशन डीड के जरिए ओरिजिनल सेल डीड को ठीक करना मुमकिन नहीं था, क्योंकि इसके लिए सभी पक्षों की मौजूदगी और सहमति जरूरी थी।
इस मामले में मूल विक्रेता की मौत हो चुकी थी। उत्तर प्रदेश रेवेन्यू कोड 2006 की धारा 38 के तहत रेवेन्यू रिकॉर्ड में क्लर्क की गलतियों को सुधारने की इजाजत है। हालांकि, वह भी यहां लागू नहीं हो सकती थी। इसका कारण गलती रजिस्टर्ड सेल डीड में ही थी।
एसडीएम ने कहा कि हमने धारा 144 पर भी विचार किया, लेकिन मालिकाना हक का कोई विवाद न होने के बावजूद उसमें एक लंबी अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता। इसलिए हमने गांव के स्तर पर तथ्यों की जांच करने का फैसला किया और मामले की जांच का फैसला लिया।
एसडीएम ने मामले की जांच के लिए लैंड मैनेजमेंट कमिटी गठित की। इसमें ग्राम प्रधान चेयरमैन और लेखपाल सेक्रेटरी थे। गांव के स्तर पर हुई जांच से यह साबित हो गया कि रिकॉर्ड में लिखे छोटे नाम उन्हीं लोगों के थे और जमीन के मालिकाना हक को लेकर कोई विवाद नहीं था। तथ्यों की जांच के बाद प्रशासन ने तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए रेवेन्यू रिकॉर्ड ठीक किए और किसानों को नई खतौनी जारी की।
एसडीएम ने कहा कि अब किसान अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं और सही रेवेन्यू रिकॉर्ड के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं।आदेश सागर 2020 के पीसीएस अधिकारी हैं। वे मूलरूप से रामपुर जिले के रहने वाले हैं। उनके किसानों की समस्या सुनने और उसका समाधान कराने की खूब चर्चा हो रही है। दोनों भाइयों ने एसडीएम की सराहना की है।