उत्तराखंड के 9 जिलों में बारिश-बिजली का अलर्ट, कोटद्वार में पेड़ गिरने से एक की मौत

टेन न्यूज़ !! 31 अक्टूबर २०२६ !! अंश कुमार गुप्ता ब्यूरो, उधमसिंह नगर, उत्तराखंड
देहरादून। उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। चक्रवात ‘अर्नब’ और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने शनिवार, 31 अक्टूबर को नौ जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की आशंका के चलते ठंड बढ़ने के आसार हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चमोली, चंपावत और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान गरज-चमक, आकाशीय बिजली और झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है। यमुनोत्री और केदारनाथ के आसपास ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पिछले दो दिनों से बर्फबारी होने की जानकारी है। शनिवार को भी ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ गिरने की संभावना जताई गई है।
कोटद्वार में पेड़ गिरने से एक की मौत
खराब मौसम का असर प्रदेश में दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को कोटद्वार में पेड़ गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दूसरा व्यक्ति घायल हो गया। शुक्रवार को गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक कई क्षेत्रों में रुक-रुककर बारिश हुई। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट और ठंड में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को किया सतर्क
मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन और जिला प्रशासन के अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आपदा प्रबंधन की तैयारियां दुरुस्त रखने, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखने को कहा है।
अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम?
31 अक्टूबर: कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश और तेज झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है।
1 नवंबर: कुछ क्षेत्रों में आंशिक बादल छाए रह सकते हैं। उपलब्ध पूर्वानुमान के अनुसार, किसी बड़े अलर्ट का उल्लेख नहीं है।
2 नवंबर: अधिकांश क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। शाम के समय कुछ स्थानों पर आंशिक बादल छा सकते हैं।
प्रशासन ने लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने और खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।