उर्स-ए-हातिमी पर ‘लफ़्ज़ों का सफ़र’ मुशायरे में गूंजी शायरी

देशभर से आए शायरों और कवियों ने पेश किए कलाम, देर रात तक वाह-वाह और तालियों से गूंजती रही महफिल
टेन न्यूज़ !! ०६ नवम्बर २०२६ !! अमुक सक्सेना , तिलहर शाहजहांपुर
तिलहर, शाहजहांपुर। उर्स-ए-हातिमी के अवसर पर ‘लफ़्ज़ों का सफ़र’ ऑल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। मशहूर शायर मुख्तार तिलहरी की अध्यक्षता में आयोजित इस अदबी महफिल में विभिन्न प्रदेशों से आए शायरों और कवियों ने अपने कलाम पेश कर श्रोताओं का दिल जीत लिया। कार्यक्रम का संचालन इबने हसन तिलहरी ने किया।
मुशायरे में बरेली से आए जीशान नोमानी ने ‘दिल कहां लगता है अब मेरा भी गांव में, खींच लाया इश्क तेरा मुझको तेरे पांव में’ सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। निर्दोष कुमार विन ने विदाई के भावों को शायरी में पिरोते हुए कहा, ‘वक्त रुखसत का है सो रुकेंगे नहीं, फिर कभी आएंगे आपके गांव में।’
डॉ. बृजभूषण ने अपने शेर ‘कोई मरहम सा पहुंचता है मेरे जख्मों तक, अब खालिस मेरी जरा और बढ़ा दी जाए’ से श्रोताओं को प्रभावित किया। हामिद खिजर ने ‘आज रानी बहुत परेशान है, जाने क्या कह दिया है दासी ने’ सुनाया। असगर यासिर ने रिश्तों और पाबंदियों पर तंज कसते हुए अपना कलाम पेश किया।![]()
मध्य प्रदेश के सागर से आए नईम माहिर ने हौसले को सलाम करने वाला शेर सुनाया। मुफीद कन्नौजवी ने ‘फकत लेके वहमो गुमां जा रहा है, मुसाफिर बता तू कहां जा रहा है’ से महफिल में रंग जमाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुख्तार तिलहरी ने ‘मुस्कुराहट पर करें क्या तबसिरे, अब तो हंसने पर भी लब हिलते नहीं’ सुनाकर श्रोताओं की दाद हासिल की।
जुनैद सकलानी बदायूं, खार शेखूपुरी, झांसी के नसीम मुंहफट और नफीस सीतापुरी ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए। उनकी शायरी पर देर रात तक श्रोताओं की ओर से वाह-वाह और तालियों की गूंज सुनाई देती रही।
कार्यक्रम में ज्येष्ठ वक्फ निरीक्षक श्रीकांत आजाद बतौर मेहमान-ए-खुसूसी शामिल हुए। पूर्व जिला पंचायत सदस्य सौरभ सिंह गांधी, पूर्व पालिका अध्यक्ष एवं भाजपा नेता देवेंद्र कुमार गुप्ता एडवोकेट, सुधाकर तिवारी एडवोकेट तथा व्यापारी नेता सौरभ गुप्ता उर्फ रवि ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की और आयोजन की सराहना की।
इस अवसर पर मनोज प्रबल, अजय अवस्थी, फैसल फैज राहत उल्ला खान, रामऔतार गुप्ता, शरीफ कुरैशी, सपा नेता लाल बाबू, साजिद अली खान, भोले खान, उवैस खां शिफा, वाजिद हुसैन वाजिद और आमिर मियां सहित अनेक लोग मौजूद रहे। अंत में सभी शायरों एवं कवियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।