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भारत में कोरोना के बाद विदेश से आया एक और वायरस, हेल्थ डिपार्टमेंट अलर्ट हुआ

By Ten News One Desk

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भारत में कोरोना के बाद विदेश से आया एक और वायरस, हेल्थ डिपार्टमेंट अलर्ट हुआ



टेन न्यूज़ !! ३० जुलाई २०२४ !! गीता बाजपेई ब्यूरो, नोएडा


अभी हम कोरोना की दहशत से बाहर निकल पाए हैं की एक और विदेशी वायरस में दस्तक दे दी है । यह वायरस कोरोना की तरह ही बताया जा रहा है। इससे संक्रमित एक युवक का इलाज हेल्थ डिपार्टमेंट ने शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि डॉक्टरों की टीम ने युवक के परिवार में सभी सदस्यों की बारी-बारी जांच की है। राहत की बात है कि किसी भी सदस्य में युवक वाली बीमारी नहीं पाई गई है। हेल्थ डिपार्टमेंट का कहना है कि युवक मलेरिया परजीवी प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम से ग्रसित पाया गया। उसका इलाज चल रहा है।

यह युवक तीन दिन पहले नाइजीरिया से नोएडा लौटा था। इसमें मलेरिया के लक्षण थे। इसलिए इसकी जांच कराई जांच के बाद पता चला कि यह युवकगई मलेरिया परजीवी प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम से ग्रसित है। फाल्सीपेरम परजीवी अफ्रीकी देशों में सबसे ज्यादा फैलता है। मरीज भी अफ्रीकी देश नाइजीरिया से आया था। इसलिए मलेरिया के लक्षण मिलने पर मरीज में फाल्सीपेरम परजीवी होने की आशंका थी। इसी वजह से जांच कराई गई जांच में इस बात की पुष्टि हो गई। मलेरिया विभाग की टीम ने युवक के घर और आसपास के घरों में दवा का छिड़काव कराया है। साथ ही युवक के परिजनों की भी मलेरिया जांच कराई गई। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

मेरी जब ठीक हो गया है लेकिन मरीज से संबंधित रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। मरीज के ठीक होने के बाद भी मलेरिया विभाग उसकी निगरानी कर रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी श्रुति कीर्ति वर्मा ने बताया कि मलेरिया के फाल्सीपेरम परजीवी से पीड़ित मरीज में लक्षण दिखने के तुरंत बाद जांच कराई गई। तीन दिन की दवा देने के बाद मरीज ठीक हो गया।

जिला मलेरिया अधिकारी श्रुति कीर्ति वर्मा ने बताया कि पिछले साल भी जिले में इस बीमारी से ग्रसित एक मरीज का इलाज हुआ था। वह भी इलाज के बाद ठीक हो गया था। अब ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही है। हेल्थ डिपार्टमेंट की एक टीम इस काम में लगी है।

मलेरिया से होने वाली कुल मौतों में 90 फीसदी फाल्सीपेरम परजीवी से पीड़ित मरीजों की होती हैं। समय पर जांच और इलाज से मरीज जल्दी ठीक हो जाता है। इसमें देरी होने पर मरीज की हालत बिगड़ जाती है।

इस साल हेल्थ डिपार्टमेंट ने मलेरिया के 24 मरीजों की पुष्टि की है। इनमें से 23 मरीज प्लास्मोडियम वाइवैक्स और एक मरीज प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम से पीड़ित मिले। फाल्सीपेरम से पीड़ित मरीज का इलाज चल रहा है। अन्य 23 मरीज ठीक हो गए हैं। अब तक डेंगू के 12 मामले सामने आ चुके हैं।

भारत में कोरोना के बाद विदेश से आया एक और वायरस, हेल्थ डिपार्टमेंट अलर्ट हुआ

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टेन न्यूज़ !! ३० जुलाई २०२४ !! गीता बाजपेई ब्यूरो, नोएडा


अभी हम कोरोना की दहशत से बाहर निकल पाए हैं की एक और विदेशी वायरस में दस्तक दे दी है । यह वायरस कोरोना की तरह ही बताया जा रहा है। इससे संक्रमित एक युवक का इलाज हेल्थ डिपार्टमेंट ने शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि डॉक्टरों की टीम ने युवक के परिवार में सभी सदस्यों की बारी-बारी जांच की है। राहत की बात है कि किसी भी सदस्य में युवक वाली बीमारी नहीं पाई गई है। हेल्थ डिपार्टमेंट का कहना है कि युवक मलेरिया परजीवी प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम से ग्रसित पाया गया। उसका इलाज चल रहा है।

यह युवक तीन दिन पहले नाइजीरिया से नोएडा लौटा था। इसमें मलेरिया के लक्षण थे। इसलिए इसकी जांच कराई जांच के बाद पता चला कि यह युवकगई मलेरिया परजीवी प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम से ग्रसित है। फाल्सीपेरम परजीवी अफ्रीकी देशों में सबसे ज्यादा फैलता है। मरीज भी अफ्रीकी देश नाइजीरिया से आया था। इसलिए मलेरिया के लक्षण मिलने पर मरीज में फाल्सीपेरम परजीवी होने की आशंका थी। इसी वजह से जांच कराई गई जांच में इस बात की पुष्टि हो गई। मलेरिया विभाग की टीम ने युवक के घर और आसपास के घरों में दवा का छिड़काव कराया है। साथ ही युवक के परिजनों की भी मलेरिया जांच कराई गई। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

मेरी जब ठीक हो गया है लेकिन मरीज से संबंधित रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। मरीज के ठीक होने के बाद भी मलेरिया विभाग उसकी निगरानी कर रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी श्रुति कीर्ति वर्मा ने बताया कि मलेरिया के फाल्सीपेरम परजीवी से पीड़ित मरीज में लक्षण दिखने के तुरंत बाद जांच कराई गई। तीन दिन की दवा देने के बाद मरीज ठीक हो गया।

जिला मलेरिया अधिकारी श्रुति कीर्ति वर्मा ने बताया कि पिछले साल भी जिले में इस बीमारी से ग्रसित एक मरीज का इलाज हुआ था। वह भी इलाज के बाद ठीक हो गया था। अब ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही है। हेल्थ डिपार्टमेंट की एक टीम इस काम में लगी है।

मलेरिया से होने वाली कुल मौतों में 90 फीसदी फाल्सीपेरम परजीवी से पीड़ित मरीजों की होती हैं। समय पर जांच और इलाज से मरीज जल्दी ठीक हो जाता है। इसमें देरी होने पर मरीज की हालत बिगड़ जाती है।

इस साल हेल्थ डिपार्टमेंट ने मलेरिया के 24 मरीजों की पुष्टि की है। इनमें से 23 मरीज प्लास्मोडियम वाइवैक्स और एक मरीज प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम से पीड़ित मिले। फाल्सीपेरम से पीड़ित मरीज का इलाज चल रहा है। अन्य 23 मरीज ठीक हो गए हैं। अब तक डेंगू के 12 मामले सामने आ चुके हैं।

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