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डिजिटल दौर में शिक्षक ही बच्चों के चरित्र के असली शिल्पकार : डॉ. अंशिका जॉर्ज

ByTen News One Desk

Sep 5, 2026
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डिजिटल दौर में शिक्षक ही बच्चों के चरित्र के असली शिल्पकार : डॉ. अंशिका जॉर्ज


टेन न्यूज़ !! ०५ सितम्बर २०२६ !! पप्पू अंसारी

मीरानपुर कटरा, शाहजहांपुर। डिजिटल युग में बच्चे जहां सूचनाओं और तकनीक की दुनिया से घिरे हुए हैं, वहीं उनके व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य को सही दिशा देने में शिक्षक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। शान इंटर कॉलेज, मीरानपुर कटरा की प्रधानाचार्या एवं शिक्षाविद् डॉ. अंशिका जॉर्ज ने शिक्षकों की बदलती भूमिका पर विचार रखते हुए कहा कि आज बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सहयोग, संस्कार और सही मार्गदर्शन की भी जरूरत है।

उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी सूचनाओं की कमी नहीं, बल्कि सूचनाओं की अधिकता के बीच जीवन जी रही है। ऐसे समय में शिक्षक सिर्फ पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व और चरित्र को आकार देने वाला सच्चा मार्गदर्शक है।

डॉ. अंशिका जॉर्ज ने कहा कि एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभा को पहचानता है, उनकी परेशानियों को समझता है और असफलता के बाद दोबारा खड़े होने का आत्मविश्वास पैदा करता है। शिक्षक बच्चों में ईमानदारी, दयालुता, अनुशासन, धैर्य और मानवीय संवेदनाओं जैसे जीवन मूल्यों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रधानाचार्या ने शान इंटर कॉलेज के शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यालय के शिक्षक आधुनिक तकनीक के साथ मानवीय मूल्यों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार हो रही है।

उन्होंने कहा कि तकनीक तत्काल जानकारी उपलब्ध करा सकती है, लेकिन एक संवेदनशील शिक्षक ही बच्चे के भीतर सपने, संस्कार और बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा पैदा कर सकता है। उनका यह संदेश बदलते दौर में शिक्षक की गरिमा और जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।

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