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रायबरेली के सीडीओ द्वारा पानी को लेकर नवाचार किया गया

By Ten News One Desk

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रायबरेली के सीडीओ द्वारा पानी को लेकर नवाचार किया गया



टेन न्यूज़ !! १८ मई २०२५ !! वसीम खान ब्यूरो, रायबरेली


रायबरेली के सीडीओ अर्पित उपाध्याय ने ज़िले में पानी को लेकर नवाचार किया है। यह नवाचार मूर्त रूप लेते ही आने वाले सैकड़ों साल तक भूगर्भीय जल की समस्या से निजात मिलेगी।

इस नवाचार में रोज़गार भी है और इससे सरकारी ज़मीन का संरक्षण भी होगा। दरअसल सीडीओ अर्पित उपाध्याय ने ज़िले भर के तीन हज़ार डाक्यूमेंट्स की स्टडी कर उसमें से पांच सौ ऐसे तालाब चिन्हित किये जो कागज़ों पर तो हैं लेकिन उनका अस्तित्व समाप्त हो गया है।

सीडीओ ने तीन हज़ार डाक्यूमेंट्स की स्टडी के बाद चिन्हित ऐसे पांच सौ तालाबों में से दो सौ अभी जबकि बाकी तीन सौ अगले वित्तीय वर्ष में मनरेगा से विकसित किये जायेंगे। इस नवाचार से वाटर रिचार्ज के अलावा इसे रोज़गार से भी जोड़ने की योजना है। सीडीओ अर्पित उपाध्याय के मुताबिक इन तालाबों को मत्स्य पालन के लिए दिया जाएगा जिससे रोज़गार सृजन भी होगा। सीडीओ अर्पित उपाध्याय का यह भी मानना है कि इस योजना से सरकारी ज़मीन का संरक्षण भी संभव होगा।

मनरेगा के माध्यम से हो रहे इस काम के जल्द ही पूरा होने की भी सम्भावना है। अमृत सरोवरों से इतर यह तालाब हर वर्ष दो दो सौ की संख्या में भी लिए जाते हैं तो आगामी चार पांच वर्षों में ज़िले भर के तालाब पानी से लबालब नज़र आएंगे।

बाइट.. अर्पित उपाध्याय.. मुख्य विकास अधिकारी

रायबरेली से ब्यूरो वसीम खान की रिपोर्ट

रायबरेली के सीडीओ द्वारा पानी को लेकर नवाचार किया गया

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रायबरेली के सीडीओ द्वारा पानी को लेकर नवाचार किया गया



टेन न्यूज़ !! १८ मई २०२५ !! वसीम खान ब्यूरो, रायबरेली


रायबरेली के सीडीओ अर्पित उपाध्याय ने ज़िले में पानी को लेकर नवाचार किया है। यह नवाचार मूर्त रूप लेते ही आने वाले सैकड़ों साल तक भूगर्भीय जल की समस्या से निजात मिलेगी।

इस नवाचार में रोज़गार भी है और इससे सरकारी ज़मीन का संरक्षण भी होगा। दरअसल सीडीओ अर्पित उपाध्याय ने ज़िले भर के तीन हज़ार डाक्यूमेंट्स की स्टडी कर उसमें से पांच सौ ऐसे तालाब चिन्हित किये जो कागज़ों पर तो हैं लेकिन उनका अस्तित्व समाप्त हो गया है।

सीडीओ ने तीन हज़ार डाक्यूमेंट्स की स्टडी के बाद चिन्हित ऐसे पांच सौ तालाबों में से दो सौ अभी जबकि बाकी तीन सौ अगले वित्तीय वर्ष में मनरेगा से विकसित किये जायेंगे। इस नवाचार से वाटर रिचार्ज के अलावा इसे रोज़गार से भी जोड़ने की योजना है। सीडीओ अर्पित उपाध्याय के मुताबिक इन तालाबों को मत्स्य पालन के लिए दिया जाएगा जिससे रोज़गार सृजन भी होगा। सीडीओ अर्पित उपाध्याय का यह भी मानना है कि इस योजना से सरकारी ज़मीन का संरक्षण भी संभव होगा।

मनरेगा के माध्यम से हो रहे इस काम के जल्द ही पूरा होने की भी सम्भावना है। अमृत सरोवरों से इतर यह तालाब हर वर्ष दो दो सौ की संख्या में भी लिए जाते हैं तो आगामी चार पांच वर्षों में ज़िले भर के तालाब पानी से लबालब नज़र आएंगे।

बाइट.. अर्पित उपाध्याय.. मुख्य विकास अधिकारी

रायबरेली से ब्यूरो वसीम खान की रिपोर्ट

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