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कथा व्यास योगेश दीक्षित महाराज ने गोवर्धन लीला एवं रासलीला का मनोहारी वर्णन किया

By Ten News One Desk

Published on:

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कथा व्यास योगेश दीक्षित महाराज ने गोवर्धन लीला एवं रासलीला का मनोहारी वर्णन किया



टेन न्यूज़ !! १७ सितम्बर २०२४ !! अमुक सक्सेना, तिलहर/शाहजहांपुर


नगर के मोहल्ला बहादुरगंज स्थित देवस्थान पर श्री राधाष्टमी के उपलक्ष्य में चल रही आठवीं श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास योगेश दीक्षित जी महाराज ने गोवर्धन लीला एवं रासलीला का मनोहारी वर्णन किया ।

कथा व्यास ने सुनाया कि जिस समय गोकुल में नंदोत्सव मनाया जा रहा था । इस दौरान कंस के द्वारा भेजी हुई पूतना राक्षसी का कृष्ण ने संहार किया ।

उसके बाद शकटासुर तृणावर्त का संहार किया। वसुदेव जी के कहने पर पुरोहित गर्गाचार्य जी ने नंद जी के यहां आकर कृष्ण और बलराम का नामकरण किया उसके बाद कृष्ण ने बाल सखाओं के साथ माखन चोरी लीला की।

यशोदा जी के द्वारा कन्हैया को उखल से बांधे जाने के बाद कन्हैया ने यमलार्जुन का उद्धार किया । जो कुबेर के बेटे थे । समस्त गोकुल वासियों ने तत्पश्चात वृंदावन में वास किया यमुना के किनारे गायों को चराते समय कन्हैया ने बत्सासुर बकासुर और अघासुर का संघार किया।बत्सासुर अंधी श्रद्धा,बकासुर दंभ और अघासुर पाप का स्वरूप है।

कृष्ण द्वारा ब्रह्मा जी के मोह का निवारण करने के बाद बलराम ने धेनुकासुर का संहार किया कृष्ण जी ने कालिया नाग नाथन,दावानल पान,चीर हरण लीला गोवर्धन लीला के बाद रासलीला का मनोहारी वर्णन किया। गोवर्धन का तात्विक भाव बताते हुए कथा व्यास बताया भक्ति और इंद्रियों का वर्धन ही गोवर्धन लीला है।

दुर्गुण रहित होकर शुद्ध होने पर जीव रासलीला में स्थान का सकता है। रासलीला में लौकिक काम का कोई महत्व नहीं है जीव और ईश्वर का निष्काम प्रेम के साथ मिलना ही रासलीला है। इस अवसर पर उमाशंकर तिवारी , राजेश दुबे , कन्हई लाल कश्यप , अनिल राठौर , वीरे कश्यप , रामनरेश , करन , अर्जुन गुप्ता समेत तमाम श्रद्धालुओ ने कथा का आनंद लिया।

कथा व्यास योगेश दीक्षित महाराज ने गोवर्धन लीला एवं रासलीला का मनोहारी वर्णन किया

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टेन न्यूज़ !! १७ सितम्बर २०२४ !! अमुक सक्सेना, तिलहर/शाहजहांपुर


नगर के मोहल्ला बहादुरगंज स्थित देवस्थान पर श्री राधाष्टमी के उपलक्ष्य में चल रही आठवीं श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास योगेश दीक्षित जी महाराज ने गोवर्धन लीला एवं रासलीला का मनोहारी वर्णन किया ।

कथा व्यास ने सुनाया कि जिस समय गोकुल में नंदोत्सव मनाया जा रहा था । इस दौरान कंस के द्वारा भेजी हुई पूतना राक्षसी का कृष्ण ने संहार किया ।

उसके बाद शकटासुर तृणावर्त का संहार किया। वसुदेव जी के कहने पर पुरोहित गर्गाचार्य जी ने नंद जी के यहां आकर कृष्ण और बलराम का नामकरण किया उसके बाद कृष्ण ने बाल सखाओं के साथ माखन चोरी लीला की।

यशोदा जी के द्वारा कन्हैया को उखल से बांधे जाने के बाद कन्हैया ने यमलार्जुन का उद्धार किया । जो कुबेर के बेटे थे । समस्त गोकुल वासियों ने तत्पश्चात वृंदावन में वास किया यमुना के किनारे गायों को चराते समय कन्हैया ने बत्सासुर बकासुर और अघासुर का संघार किया।बत्सासुर अंधी श्रद्धा,बकासुर दंभ और अघासुर पाप का स्वरूप है।

कृष्ण द्वारा ब्रह्मा जी के मोह का निवारण करने के बाद बलराम ने धेनुकासुर का संहार किया कृष्ण जी ने कालिया नाग नाथन,दावानल पान,चीर हरण लीला गोवर्धन लीला के बाद रासलीला का मनोहारी वर्णन किया। गोवर्धन का तात्विक भाव बताते हुए कथा व्यास बताया भक्ति और इंद्रियों का वर्धन ही गोवर्धन लीला है।

दुर्गुण रहित होकर शुद्ध होने पर जीव रासलीला में स्थान का सकता है। रासलीला में लौकिक काम का कोई महत्व नहीं है जीव और ईश्वर का निष्काम प्रेम के साथ मिलना ही रासलीला है। इस अवसर पर उमाशंकर तिवारी , राजेश दुबे , कन्हई लाल कश्यप , अनिल राठौर , वीरे कश्यप , रामनरेश , करन , अर्जुन गुप्ता समेत तमाम श्रद्धालुओ ने कथा का आनंद लिया।

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