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सुखन तराश फाउंडेशन की ओर से मोहल्ला चौहटियां स्थित ग्लोब पब्लिक स्कूल में एक अज़ीमुशान मुशायरे का आयोजन

ByTen News One Desk

Aug 19, 2025
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सुखन तराश फाउंडेशन की ओर से मोहल्ला चौहटियां स्थित ग्लोब पब्लिक स्कूल में एक अज़ीमुशान मुशायरे का आयोजन



टेन न्यूज़ !! १९ अगस्त २०२५ !! अमुक सक्सेना, तिलहर/शाहजहांपुर


बीती रात सुखन तराश फाउंडेशन की ओर से मोहल्ला चौहटियां स्थित ग्लोब पब्लिक स्कूल में एक अज़ीमुशान मुशायरे का आयोजन किया गया जिसमें दूर दराज़ से आए शायरों ने शिरकत की
मुशायरे की अध्यक्षता मुख्तार तिलहरी और संचालन वाजिद हुसैन वाजिद ने किया
मुख्य अतिथि अनवर अली रहे
मुशायरे में तिलहर के अलावा खटीमा बरेली रामपुर बदायूं शाहजहांपुर कटरा जलालपुर और मुरादाबाद के शायरों ने शिरकत की प्रोग्राम देर रात तक चलता रहा
मुशायरे का शुभारम्भ मसूद हुसैन लाडले मियां ने नात ए पाक से किया
मुख्तार तिलहरी ने सुनाया
जिंदगी को जिंदगी भर जिंदगी समझा मगर
जिंदगी फिर भी तलाशे जिंदगी करती रही
शमशाद आतिफ ने कहा
ज़ुल्म की शिद्दत हद से जब बढ़ जाती है
गूंगे भी आवाज़ उठाने लगते हैं
उस्मान आबिद जलालपुरी ने सुनाया
बिगड़ गया तो तेरा ताज नोच डालूंगा
मुझे अब और तू झूठी तसल्लियां मत दे
साजिद सफ़दर ने कहा
चांदी की तरफ रुख है न सोने की तरफ रुख
हर डूबने वाले का है तिनके की तरफ रुख
खटीमा से आए शायर आकिब जावेद ने सुनाया
एक रात मेरी रूह को बख्शी गई हयात
एक रात मुझको मौत का तोहफा दिया गया
खलीक शौक शाहजहांपुरी ने कहा
इस ज़माने ने साहिफों को ही ठुकराया है
तुम कलम छोड़के तलवार उठा कर देखो
बरेली से आए शायर अहमद अज़ीम ने सुनाया
सोच कर खुश हूं रसाई है वहां तक मेरी
चली जाती है नज़र उसके मका तक मेरी
मुसारिफ हुसैन बरेलवी ने कहा
इतनी फुर्सत भी नहीं है कि लिपट कर रो लें
ऐसे बिछड़े भी नहीं हैं कि करार आ जाए
इफ्तिखार हुसैन खार शेखुपुरी गुनगुनाया
जब भी तक़दीर रूठ जाती है
आस बंधती है टूट जाती है
वाजिद हुसैन वाजिद ने कहा
कोट कचहरी तो इंसाफ के मंदिर हैं
मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पड़ता है
उवैस ख़ां शिफा ने सुनाया
हालांकि उससे कोई भी रिश्ता नहीं रहा
लेकिन वो मेरे ज़हन में जिंदा है आज भी
हसन तिलहरी ने कहा
ये सोच कर फ़कीर ने दुनिया त्याग दी
अब और कुछ मिले न मिले बस ख़ुदा मिले
शरीफ आलम कटरावी ने कहा
सब ने हैरत से मेरे घर के उजाले देखे
पर किसी ने न मेरे पाऊं के छाले देखे
रेहान ताबिश ने सुनाया
चंद लम्हा शबाब की खुशबू
यूं समझिए गुलाब की खुशबू
फैसल फैज़ ने कहा
क्यों ऐसा लग रहा है कि सब कुछ चला गया
उसके सिवा कुछ और तो खोया नहीं जनाब
फरीद तिलहरी ने सुनाया
हजार जुल्मत क़दे बना तू मगर समझ ले
वहां ये मसनद ये हुक्मरानी नहीं चलेगी
इनके अलावा फहीम बिस्मिल अर्शियांन अर्श ने भी अपने कलाम पेश किए
मुशायरा देर रात तक चलता रहा
मुशायरे में बसीरुद्दीन अमीर मियां अब्दुल राशिद मास्टर शाहिद अली फरीदुद्दीन गुड्डू हाफिज फैसल हाफिज अजीम फरीद रफीक तौफीक आसिफ खान छोटू आरिफ खान हाशिम ममनून राईन दानिश फैज शादान आदि मौजूद रहे

अंत में आयोजक टीम सुखन तराश ने सभी को स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र भेंट किए

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