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आम बजट 2026 : शिक्षा, कौशल और सेवा क्षेत्र पर बड़ा दांव, युवाओं को रोजगार से जोड़ने की नई रणनीति

By Ten News One Desk

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आम बजट 2026 : शिक्षा, कौशल और सेवा क्षेत्र पर बड़ा दांव, युवाओं को रोजगार से जोड़ने की नई रणनीति


टेन न्यूज़ ii 01 फरवरी 2026 ii डेस्क न्यूज़, नई दिल्ली

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026–27 का आम बजट पेश करते हुए स्पष्ट संकेत दिया कि सरकार की प्राथमिकता अब शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार को एक मजबूत श्रृंखला में जोड़ना है। यह उनका लगातार नौवां बजट है, जिसमें भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कई संरचनात्मक घोषणाएं की गईं।

बजट का केंद्रीय विषय “युवा, कौशल और अवसर” रहा। वित्त मंत्री ने ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ नाम से एक हाई-पावर स्थायी समिति के गठन की घोषणा की। यह समिति शिक्षा व्यवस्था को उद्योग और सेवा क्षेत्र की जरूरतों से जोड़ने की रूपरेखा तैयार करेगी। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और उभरती तकनीकों के रोजगार पर प्रभाव का आकलन कर भविष्य के लिए आवश्यक स्किल बदलाव सुझाएगी।

सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने का भी ऐलान किया। छात्राओं की उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने के लिए देशभर के जिलों में नए हॉस्टल बनाए जाएंगे। औद्योगिक गलियारों के पास विशेष यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित की जाएंगी, जहां पढ़ाई, शोध और उद्योग सहयोग एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा। विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक प्रयोगशालाओं और नए टेलीस्कोप इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना की भी घोषणा की गई।

वित्त मंत्री ने कहा कि शिक्षा अब केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसे सीधे रोजगार और उद्यमिता से जोड़ा जाएगा। सेवा क्षेत्र को विकास का प्रमुख इंजन मानते हुए सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2047 तक वैश्विक सेवा व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक पहुंचे। नई समिति उन क्षेत्रों की पहचान करेगी जहां रोजगार और निर्यात की सर्वाधिक संभावनाएं हैं।

आर्थिक प्रबंधन के मोर्चे पर सरकार ने वित्तीय अनुशासन जारी रखने का संकेत दिया। राजकोषीय घाटा 4.3 प्रतिशत रखने का लक्ष्य तय किया गया है। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पूंजीगत व्यय बढ़ाकर लगभग 12 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जिससे सड़क, रेल, जलमार्ग और शहरी ढांचे को गति मिलेगी। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म और लॉजिस्टिक सुधारों को भी बढ़ावा देने की बात कही गई।

टैक्स के मोर्चे पर इस बार इनकम टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, जिससे मध्यम वर्ग को स्थिरता का संदेश मिला है। हालांकि उद्योग और निर्यात क्षेत्रों के लिए कुछ कर रियायतों के संकेत दिए गए हैं।

स्वास्थ्य और शोध क्षेत्र में भी निवेश बढ़ाने की घोषणा की गई, जबकि कृषि क्षेत्र के आवंटन को लेकर विशेषज्ञों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। बजट पेश होने के बाद शेयर बाजार में शुरुआती उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित नीतियों को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

कुल मिलाकर बजट 2026–27 का संदेश साफ है — पढ़ाई से नौकरी और नौकरी से उद्यमिता तक एक सशक्त आर्थिक चक्र तैयार करना, ताकि युवा भारत की विकास यात्रा का मुख्य आधार बन सकें।

आम बजट 2026 : शिक्षा, कौशल और सेवा क्षेत्र पर बड़ा दांव, युवाओं को रोजगार से जोड़ने की नई रणनीति

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टेन न्यूज़ ii 01 फरवरी 2026 ii डेस्क न्यूज़, नई दिल्ली

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026–27 का आम बजट पेश करते हुए स्पष्ट संकेत दिया कि सरकार की प्राथमिकता अब शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार को एक मजबूत श्रृंखला में जोड़ना है। यह उनका लगातार नौवां बजट है, जिसमें भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कई संरचनात्मक घोषणाएं की गईं।

बजट का केंद्रीय विषय “युवा, कौशल और अवसर” रहा। वित्त मंत्री ने ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ नाम से एक हाई-पावर स्थायी समिति के गठन की घोषणा की। यह समिति शिक्षा व्यवस्था को उद्योग और सेवा क्षेत्र की जरूरतों से जोड़ने की रूपरेखा तैयार करेगी। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और उभरती तकनीकों के रोजगार पर प्रभाव का आकलन कर भविष्य के लिए आवश्यक स्किल बदलाव सुझाएगी।

सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने का भी ऐलान किया। छात्राओं की उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने के लिए देशभर के जिलों में नए हॉस्टल बनाए जाएंगे। औद्योगिक गलियारों के पास विशेष यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित की जाएंगी, जहां पढ़ाई, शोध और उद्योग सहयोग एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा। विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक प्रयोगशालाओं और नए टेलीस्कोप इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना की भी घोषणा की गई।

वित्त मंत्री ने कहा कि शिक्षा अब केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसे सीधे रोजगार और उद्यमिता से जोड़ा जाएगा। सेवा क्षेत्र को विकास का प्रमुख इंजन मानते हुए सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2047 तक वैश्विक सेवा व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक पहुंचे। नई समिति उन क्षेत्रों की पहचान करेगी जहां रोजगार और निर्यात की सर्वाधिक संभावनाएं हैं।

आर्थिक प्रबंधन के मोर्चे पर सरकार ने वित्तीय अनुशासन जारी रखने का संकेत दिया। राजकोषीय घाटा 4.3 प्रतिशत रखने का लक्ष्य तय किया गया है। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पूंजीगत व्यय बढ़ाकर लगभग 12 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जिससे सड़क, रेल, जलमार्ग और शहरी ढांचे को गति मिलेगी। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म और लॉजिस्टिक सुधारों को भी बढ़ावा देने की बात कही गई।

टैक्स के मोर्चे पर इस बार इनकम टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, जिससे मध्यम वर्ग को स्थिरता का संदेश मिला है। हालांकि उद्योग और निर्यात क्षेत्रों के लिए कुछ कर रियायतों के संकेत दिए गए हैं।

स्वास्थ्य और शोध क्षेत्र में भी निवेश बढ़ाने की घोषणा की गई, जबकि कृषि क्षेत्र के आवंटन को लेकर विशेषज्ञों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। बजट पेश होने के बाद शेयर बाजार में शुरुआती उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित नीतियों को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

कुल मिलाकर बजट 2026–27 का संदेश साफ है — पढ़ाई से नौकरी और नौकरी से उद्यमिता तक एक सशक्त आर्थिक चक्र तैयार करना, ताकि युवा भारत की विकास यात्रा का मुख्य आधार बन सकें।

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