फसल अवशेष न जलाने का संकल्प लें किसान, पर्यावरण संरक्षण में निभाएं महत्वपूर्ण भूमिका : असीम अरुण![]()
कन्नौज में जनपद स्तरीय कृषक जागरूकता गोष्ठी एवं कृषि प्रदर्शनी आयोजित, 700 से अधिक किसानों ने लिया भाग
टेन न्यूज़ ।। 01 अक्टूबर 2026 ।। प्रभाष चन्द्र ब्यूरो
कन्नौज। फसल अवशेष जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति किसानों को जागरूक करने और पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक उपायों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजीड्यू योजना के तहत जनपद स्तरीय कृषक जागरूकता गोष्ठी एवं कृषि प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज कल्याण राज्य मंत्री, उत्तर प्रदेश शासन असीम अरुण ने की। इसमें जनपद के विभिन्न विकासखंडों से आए 700 से अधिक प्रगतिशील एवं सम्मानित किसानों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक संतोष कुमार, जिला उद्यान अधिकारी आशीष कटियार, जिला कृषि अधिकारी संत लाल गुप्ता, भूमि संरक्षण अधिकारी कौशल किशोर तथा कृषि विज्ञान केंद्र अनौगी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अभिमन्यु सहित कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
आधुनिक कृषि यंत्रों से करें फसल अवशेषों का प्रबंधन
उप कृषि निदेशक संतोष कुमार ने किसानों को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए फसल अवशेष प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों से पराली जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से उसका प्रबंधन करने की अपील की। उन्होंने बताया कि कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र अथवा एसएमएस का प्रयोग किया जाए। फसल कटाई के बाद रोटावेटर, हैप्पी सीडर सहित अन्य कृषि यंत्रों के माध्यम से अवशेषों को खेत में ही मिट्टी में मिलाया जा सकता है।
पराली जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान
कृषि विज्ञान केंद्र अनौगी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अभिमन्यु ने बदलती जलवायु और खेती पर पड़ रहे प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी के उपयोगी सूक्ष्मजीव एवं पोषक तत्व प्रभावित होते हैं। इसके विपरीत खेत में फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने से जैविक खाद तैयार होती है तथा मिट्टी की संरचना और उर्वरता में सुधार होता है।
किसानों को वितरित किए कृषि यंत्र और मिनीकिट
मुख्य अतिथि राज्य मंत्री असीम अरुण ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती को आधुनिक एवं तकनीक आधारित बनाने और कृषि लागत कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र, ट्रैक्टर एवं बीज उपलब्ध कराने के साथ विभिन्न फसलों के निःशुल्क मिनीकिट भी वितरित किए जा रहे हैं।
उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने और किसी भी परिस्थिति में फसल अवशेष न जलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उचित प्रबंधन के माध्यम से पराली को उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है। इससे मृदा स्वास्थ्य बेहतर होने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान इन-सीटू कस्टम हायरिंग सेंटर के अंतर्गत ग्राम मवईया, पोस्ट खानपुर, विकासखंड उमर्दा निवासी लाभार्थी किसान देवेन्द्र प्रताप सिंह को कृषि यंत्र वितरित किया गया। इसके अलावा करीब 10 किसानों को निःशुल्क मिनीकिट प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के अंत में जिला कृषि अधिकारी संत लाल गुप्ता ने अधिकारियों, वैज्ञानिकों, किसानों और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने किसानों से फसल अवशेष न जलाने तथा वैज्ञानिक पद्धति से उसके प्रबंधन का संकल्प लेने का आह्वान किया।