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दीपावली के त्यौहार के पूर्व मिलावट खोर सक्रिय सिंथेटिक प्रदूषित वासी मिठाइयों के लगे अंबार, मोटा मुनाफा कमाने को भंडारित सिंथेटिक मिठाइयां अंजान बने अधिकारी

ByTen News One Desk

Oct 19, 2025
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दीपावली के त्यौहार के पूर्व मिलावट खोर सक्रिय सिंथेटिक प्रदूषित वासी मिठाइयों के लगे अंबार, मोटा मुनाफा कमाने को भंडारित सिंथेटिक मिठाइयां अंजान बने अधिकारी



सिंथेटिक मिलावटी मिठाइयों की जांच के नाम पर सिर्फ होती दिख रही कागजी खानापूर्ति


टेन न्यूज़ !! १९ अक्टूबर २०२५ !!  ब्यूरो चीफ रामजी पोरवाल,औरैया।


दीपावली त्यौहार पर मोटा मुनाफा कमाने की मंशा से मिलावट खोर सक्रिय हो गये हैं, जिलेभर के कस्बों व गांवों में मिलावटखोरी व सिंथेटिक खाद्य पदार्थों से स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक हैं, बिना दूध खोए के केमिकल युक्त सिंथेटिक प्रदूषित वासी मिठाइयां दुकानदारों द्वारा नियम कानून को ठेंगा दिखाते हुए बड़े पैमाने पर भंडारित कर सरेआम बेची जा रहे हैं और इन मिठाइयों के सेवन से जन स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा होने की संभावना बनी रहती है, इसकी शिकायत किए जाने के बावजूद संबंधित जिम्मेदार अंजान बने हुए हैं जिससे बुद्धिजीवियों में भारी नाराजगी भड़क रही है।

हालांकि सिंथेटिक मिठाइयों की बिक्री के खिलाफ उठाई जा रही आवाज पर संबंधित अधिकारियों द्वारा सिर्फ जांच के नाम पर कागजी खानापूर्ति की रस्म अदायगी ही नजर आ रही है। दीपावली त्यौहार पर मोटा मुनाफा कमाने की मंशा से यूं तो जिले के औरैया जिले के अजीतमल, बाबरपुर, दिबियापुर, अटसू , कंचौसी, मुरादगंज, ककोर, सहायल, फफूंद, बिधूना रुरुगंज, अछल्दा, नेविलगंज, कुदरकोट, वैवाह, रामगढ़, हरचंदपुर, सहार, बेला, याकूबपुर, मल्हौसी, पुर्वा सुजान, ऐरवाकटरा, उमरैन,जुआ आदि कस्बों गांवों में 95 प्रतिशत मिठाई विक्रेताओं द्वारा नियम कानून को ठेका दिखाते हुए लगातार बिना दूध खोए की केमिकल युक्त सिंथेटिक प्रदूषित बासी मिठाइयों का बड़े पैमाने पर भंडारण कर सरेआम धड़ल्ले पर बिक्री कर जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बदलते मौसम में यह सिंथेटिक मिठाइयां लोगों के स्वास्थ्य पर और अधिक भारी प्रभाव डालती हैं।

आलम यह है कि मिठाई विक्रेताओं द्वारा दिल्ली, भरथना, कानपुर, आगरा समेत कई शहरों से बिना दूध खोए के स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक रसायनों से बनी रंग बिरंगी आकर्षक मिठाइयां काफी सस्ते मूल्य पर खरीद कर लोडरों से भरकर उपरोक्त कस्बों में स्थित अपने गोपनीय गोदामों में भंडारण करने के साथ दुकानों पर रखे काउंटरों में भी बेखौफ होकर सजाई जाती हैं। इस संबंध में कुछ दुकानदारों से पूछने पर उनका कहना है कि वह पहले सिंथेटिक मिठाइयां नहीं बेचते थे लेकिन अब जब अधिकांश दुकानदार सिंथेटिक मिठाइयां बेच रहे हैं तो उनका धंधा प्रभावित होने से उनकी भी मजबूरी है क्योंकि यह अधिक सस्ते मूल्य पर मिल जाती हैं और मुनाफा अधिक होता है और दूध खोए से मिठाइयां तैयार करने पर मिठाइयों में लागत अधिक आती है और मुनाफा मामूली होता है।

यह सिंथेटिक प्रदूषित वासी मिठाइयां खाने से लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक होती हैं, जिसके खिलाफ क्षेत्रीय बुद्धिजीवियों द्वारा लगातार आवाज उठाए जाने के बावजूद भी इस पर अंकुश लगाने वाले जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं जिससे लोगों में आक्रोश भी दिख रहा है। ऐसा जरूर है कि सिंथेटिक मिठाइयों की बिक्री के विरुद्ध आवाज उठाए जाने पर संबंधित अधिकारियों द्वारा कभी-कभी जांच के नाम पर कागजी खानापूर्ति के लिए रस्म अदायगी जरूर नजर आ रही है।

इस संबंध में जनचर्चा तो आम यह है कि संबंधित अधिकारियों व मिठाई विक्रेताओं की मिलीभगत है और संबंधित अधिकारी मिठाई विक्रेताओं से मोटी बधौरी वसूल रहे हैं शायद इसी कारण इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। हालांकि इस संबंध में पूछे जाने पर खाद्य निरीक्षण विभाग के अधिकारियों ने किसी भी प्रकार की बधौरी वसूलने की बात से साफ इंकार करते हुए किसी भी कीमत पर सिंथेटिक मिठाइयों की बिक्री न होने और जल्द जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है।

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