पराली प्रबंधन के लिए कन्नौज में आठ प्रचार वाहन रवाना

अपर जिलाधिकारी देवेंद्र सिंह ने कलेक्ट्रेट से दिखाई हरी झंडी, गांव-गांव जाकर किसानों को करेंगे जागरूक
टेन न्यूज़ !! ०५ नवम्बर २०२६ !! प्रभाष चन्द्र ब्यूरो ,कन्नौज यूपी
कन्नौज। फसल अवशेष प्रबंधन और पराली जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए जनपद में विशेष अभियान शुरू किया गया है। इसी क्रम में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) देवेंद्र सिंह ने कलेक्ट्रेट परिसर से आठ विशेष प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। प्रत्येक विकासखंड के लिए एक प्रचार वाहन निर्धारित किया गया है।
ये वाहन गांव-गांव पहुंचकर किसानों को फसल अवशेष यानी पराली न जलाने और उसके उचित प्रबंधन के तरीके बताएंगे। किसानों को पराली को जैविक खाद में बदलने तथा आधुनिक कृषि यंत्रों और तकनीकों का उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। इससे मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव और मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा वायु प्रदूषण बढ़ता है और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता पर भी असर पड़ता है। खेतों में पराली जलाने से आग आसपास के खेतों, खलिहानों, खड़ी फसलों और आबादी तक फैलने का खतरा भी रहता है।![]()
पराली जलाने पर लगेगा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अर्थदंड
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के क्रम में पराली जलाने की घटनाओं पर निर्धारित अर्थदंड के बारे में भी किसानों को जानकारी दी जाएगी।
- दो एकड़ से कम कृषि भूमि पर प्रति घटना 5,000 रुपये।
- दो एकड़ से अधिक और पांच एकड़ तक भूमि पर प्रति घटना 10,000 रुपये।
- पांच एकड़ से अधिक कृषि भूमि पर प्रति घटना 30,000 रुपये।
अपर जिलाधिकारी देवेंद्र सिंह ने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करें और उपलब्ध कृषि यंत्रों का इस्तेमाल कर फसल अवशेषों को खाद एवं अन्य उपयोगी संसाधनों में परिवर्तित करें। उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन से पर्यावरण संरक्षण के साथ खेतों की उर्वरा शक्ति भी बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कन्नौज से प्रभाष चंद्र की खास रिपोर्ट।