बांदा में सरकारी टेंडरों को लेकर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

ठेकेदार सुरेश गुप्ता की कथित भूमिका और संपत्ति को लेकर चर्चाएं, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं; संबंधित पक्षों का जवाब आना बाकी
टेन न्यूज़ !! ०४ नवम्बर २०२६ !! माया तिवारी ब्यूरो बाँदा यूपी
बांदा। जनपद में सरकारी विकास कार्यों के ठेकों और टेंडर प्रक्रिया को लेकर ठेकेदार सुरेश गुप्ता की कथित भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। टेंडर आवंटन, अधिकारियों से संपर्क और कथित राजनीतिक पहुंच को लेकर चर्चाएं सामने आई हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और फिलहाल इनके समर्थन में प्रमाणित साक्ष्य सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।
जनपद में सड़क, नाली, भवन निर्माण सहित विभिन्न विकास कार्यों के लिए सरकारी विभागों की ओर से निविदाएं जारी की जाती हैं। इनका उद्देश्य पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के तहत योग्य ठेकेदारों को कार्य आवंटित करना है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि विभिन्न विभागों में ठेके आवंटित करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित हो रही है या नहीं।
मामले में ठेकेदार की कथित संपत्ति और कारोबार को लेकर भी जांच की मांग उठाई जा रही है। हालांकि, संपत्ति के वास्तविक मूल्य, आय के स्रोत और सरकारी कार्यों से उनके संबंधों के बारे में कोई प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया है। इन पहलुओं पर स्थिति संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान कथित आर्थिक लेनदेन को लेकर भी दावे किए जा रहे हैं। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। भुगतान से संबंधित दस्तावेज या अन्य ठोस साक्ष्य सामने आने पर ही मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
टेंडर रिकॉर्ड की जांच जरूरी
पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच के लिए संबंधित विभागों के निविदा दस्तावेज, प्रतिस्पर्धी बोलियां, कार्य आवंटन, भुगतान अभिलेख और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की समीक्षा की जा सकती है। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि निविदा प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई या कहीं अनियमितता हुई।
फिलहाल लगाए जा रहे आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। निष्पक्ष तस्वीर सामने लाने के लिए संबंधित ठेकेदार का पक्ष और विभागीय अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी जरूरी है। जांच और सभी पक्षों के तथ्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाना उचित होगा।