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प्रधानों के कार्यकाल विस्तार की मांग, मुख्य सचिव को भेजा ज्ञापन

By Ten News One Desk

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प्रधानों के कार्यकाल विस्तार की मांग, मुख्य सचिव को भेजा ज्ञापन


टेन न्यूज़ ii 19 मार्च 2026 ii ब्यूरो चीफ रामजी पोरवाल
औरैया।* पंचायत चुनाव समय पर न होने की आशंका के बीच ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को बढ़ाने या उन्हें प्रशासक के रूप में कार्यरत रखने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस संबंध में पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन उत्तर प्रदेश ने मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन को ज्ञापन भेजकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पाण्डेय ने अपने पत्र में उल्लेख करते हुए कहा कि कोरोना काल के दौरान ग्राम पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित हुए थे, इसके बावजूद ग्राम प्रधानों ने सीमित संसाधनों में भी सरकारी योजनाओं को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ऐसे में यदि पंचायत चुनावों में देरी होती है, तो वर्तमान प्रधानों को ही कार्य करने का अवसर दिया जाना उचित होगा। ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान प्रधानों के अनुभव का लाभ उठाकर विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखी जा सकती है।

यदि चुनावों के बीच प्रशासनिक शून्यता उत्पन्न होती है, तो इससे विकास योजनाएं प्रभावित होंगी और ग्रामीण व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।संगठन ने यह भी बताया कि पूर्व में भी ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जा चुका है, जिससे यह व्यवस्था नई नहीं है।

73वें संविधान संशोधन के तहत राज्य सरकार को इस प्रकार के निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है।

अन्य राज्यों, विशेषकर राजस्थान का उदाहरण देते हुए संगठन ने मांग की है कि वहां की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्य करने की अनुमति दी जाए।

अंत में संगठन ने आग्रह किया कि चुनावों में विलंब की स्थिति में ग्राम प्रधानों को कार्य जारी रखने दिया जाए, ताकि विकास कार्य बाधित न हों और जनता से किए गए वादे पूरे किए जा सकें।

प्रधानों के कार्यकाल विस्तार की मांग, मुख्य सचिव को भेजा ज्ञापन

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टेन न्यूज़ ii 19 मार्च 2026 ii ब्यूरो चीफ रामजी पोरवाल
औरैया।* पंचायत चुनाव समय पर न होने की आशंका के बीच ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को बढ़ाने या उन्हें प्रशासक के रूप में कार्यरत रखने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस संबंध में पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन उत्तर प्रदेश ने मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन को ज्ञापन भेजकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पाण्डेय ने अपने पत्र में उल्लेख करते हुए कहा कि कोरोना काल के दौरान ग्राम पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित हुए थे, इसके बावजूद ग्राम प्रधानों ने सीमित संसाधनों में भी सरकारी योजनाओं को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ऐसे में यदि पंचायत चुनावों में देरी होती है, तो वर्तमान प्रधानों को ही कार्य करने का अवसर दिया जाना उचित होगा। ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान प्रधानों के अनुभव का लाभ उठाकर विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखी जा सकती है।

यदि चुनावों के बीच प्रशासनिक शून्यता उत्पन्न होती है, तो इससे विकास योजनाएं प्रभावित होंगी और ग्रामीण व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।संगठन ने यह भी बताया कि पूर्व में भी ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जा चुका है, जिससे यह व्यवस्था नई नहीं है।

73वें संविधान संशोधन के तहत राज्य सरकार को इस प्रकार के निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है।

अन्य राज्यों, विशेषकर राजस्थान का उदाहरण देते हुए संगठन ने मांग की है कि वहां की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्य करने की अनुमति दी जाए।

अंत में संगठन ने आग्रह किया कि चुनावों में विलंब की स्थिति में ग्राम प्रधानों को कार्य जारी रखने दिया जाए, ताकि विकास कार्य बाधित न हों और जनता से किए गए वादे पूरे किए जा सकें।

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