महर्षि वाल्मीकि जयंती पर कन्नौज में गूंजे भजन, धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

तिर्वा में ऊर्जा राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत ने की सहभागिता, कन्नौज के वाल्मीकि मंदिर में जिलाधिकारी ने अर्पित किए पुष्प
टेन न्यूज़ !! २७ अक्टूबर २०२६ !! प्रभाष चन्द्र ब्यूरो
कन्नौज। महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर जनपदभर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों तथा जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री के मार्गदर्शन में विभिन्न वाल्मीकि मंदिरों में भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और अन्य धार्मिक गतिविधियां आयोजित हुईं। कार्यक्रमों के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि के जीवन, उनके विचारों और सामाजिक योगदान को याद किया गया।
तिर्वा में ऊर्जा राज्य मंत्री ने की सहभागिता
विधानसभा तिर्वा में आयोजित महर्षि वाल्मीकि जयंती कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत ने सहभागिता की। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिभागियों ने भक्ति गीत, कविताएं और नाट्य प्रस्तुतियां देकर उपस्थित लोगों को भावविभोर किया। प्रस्तुतियों के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि के जीवन और उनके आदर्शों को रेखांकित किया गया।
काजीटोला स्थित वाल्मीकि मंदिर में पहुंचे जिलाधिकारी
कन्नौज नगर के काजीटोला स्थित वाल्मीकि मंदिर, एसबीएस कॉलेज के निकट, आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने प्रतिभाग किया। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके योगदान को याद किया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि केवल रामायण के रचयिता ही नहीं, बल्कि अपने विचारों और ज्ञान के माध्यम से समाज को दिशा देने वाले महान ऋषि थे। उनके संदेश समानता, न्याय, सामाजिक समरसता और सद्भाव की प्रेरणा देते हैं। उनके आदर्श आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं।![]()
भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों से भक्तिमय हुआ माहौल
महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर जनपद के विभिन्न स्थानों पर भजन-कीर्तन, शोभायात्राओं और प्रसाद वितरण सहित अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर महर्षि वाल्मीकि के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
जिलाधिकारी ने कार्यक्रमों के आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सद्भावना, आपसी भाईचारे और सकारात्मक विचारों का संचार करते हैं। महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को आत्मसात कर सामाजिक समरसता और समानता को मजबूत बनाया जा सकता है।![]()
महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों ने जनपद में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का संदेश दिया।
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