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कटरा में राज्य कर विभाग की बड़ी कार्रवाई, फर्जी बिलिंग नेटवर्क का खुलासा, लाखों की चोरी आई सामने, और भी कई फर्मे हेराफेरी में जुटी

ByTen News One Desk

Jul 13, 2026
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कटरा में राज्य कर विभाग की बड़ी कार्रवाई, फर्जी बिलिंग नेटवर्क का खुलासा, लाखों की चोरी आई सामने, और भी कई फर्मे हेराफेरी में जुटी


एमके एंटरप्राइजेज व पार्थ कंस्ट्रक्शन पर विशेष जांच में 55 लाख रुपये से अधिक की संभावित कर चोरी सामने आई


टेन न्यूज ii 13 जुलाई 2026 ii पप्पू अंसारी, शाहजहांपुर/मीरानपुर कटरा।

जनपद शाहजहांपुर के मीरानपुर कटरा क्षेत्र में राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए सर्वश्री एमके एंटरप्राइजेज एवं सर्वश्री पार्थ कंस्ट्रक्शन पर विशेष जांच अभियान चलाया। कार्रवाई उप आयुक्त (विशेष अनुसंधान शाखा) बरेली अनिरुद्ध सिंह के नेतृत्व में की गई। जांच दल में सहायक आयुक्त वेद प्रकाश शुक्ला, राज्य कर अधिकारी ताराचंद तथा गोकुल भी शामिल रहे।

विभाग को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि क्षेत्र में फर्जी कर चालानों (फेक इनवॉइस) के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का अनुचित लाभ लिया जा रहा है। इसी आधार पर दोनों फर्मों के अभिलेख, जीएसटी पोर्टल के आंकड़ों और व्यापारिक लेन-देन की गहन जांच की गई।

जांच में एमके एंटरप्राइजेज के संबंध में सामने आया कि फर्म ने पिछले लगभग एक वर्ष में करीब 5 करोड़ रुपये का कारोबार दर्शाया। इस पर लगभग 70 लाख रुपये की कर देयता बनी, लेकिन केवल 25 लाख रुपये ही जमा किए गए। शेष लगभग 45 लाख रुपये का समायोजन दिल्ली और मध्य प्रदेश की संदिग्ध फर्मों से प्राप्त आईटीसी के माध्यम से किया गया।

विभाग की जांच में दिल्ली और मध्य प्रदेश तक फैले एक संगठित बोगस बिलिंग नेटवर्क का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में अब तक 55 लाख रुपये से अधिक की संभावित कर चोरी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार संबंधित फर्मों द्वारा 50 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी कर चालान जारी किए जाने के संकेत मिले हैं। इस संबंध में दिल्ली एवं मध्य प्रदेश के राज्य कर विभागों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजे जा रहे हैं।

वहीं पार्थ कंस्ट्रक्शन की जांच में पाया गया कि फर्म ने ऐसी फर्मों से आईटीसी का लाभ लिया, जिनका जीएसटी पंजीकरण पहले ही निरस्त किया जा चुका है। साथ ही कुछ कार्यों पर देय 18 प्रतिशत जीएसटी के स्थान पर 12 प्रतिशत कर जमा कर कम कर भुगतान किए जाने की भी बात सामने आई है।

राज्य कर विभाग ने दोनों फर्मों को 20 जुलाई तक अपना पक्ष एवं आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कर निर्धारण, कर एवं ब्याज की वसूली तथा विधिक कार्रवाई की जाएगी।

जांच के दौरान विभाग ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अभिलेख अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित कर लिए हैं। इनका विस्तृत परीक्षण जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद कर चोरी की वास्तविक राशि का निर्धारण कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सूत्रों के मुताबिक नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में और ऐसी कई फर्मे संचालित हो रहीं है जो लाखों का व्यापार प्रतिदिन करती है और बड़े पैमाने पर हेराफेरी करके टैक्स चोरी कर रहीं हैं. जो जाँच का विषय हैं.

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