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अदालत के आदेश को रौंदते हुए लेखपाल ने रची फर्जीवाड़े की साज़िश, पीड़ित ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार

By Ten News One Desk

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अदालत के आदेश को रौंदते हुए लेखपाल ने रची फर्जीवाड़े की साज़िश, पीड़ित ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार



टेन न्यूज़ !! ०५ जुलाई २०२५ !! प्रभाष चन्द्र ब्यूरो, कन्नौज


उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक सिस्टम पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। उच्च न्यायालय के स्पष्ट स्थगन आदेश के बावजूद एक लेखपाल ने फर्जी तरीके से भूमि का आवंटन कर डाला — और अब पीड़ित दर-दर की ठोकरें खा रहा है, लेकिन न्याय नहीं मिल रहा!

ग्राम सरसई निवासी अनोखेलाल उप प्रधान ने एक विस्फोटक आरोप लगाते हुए कहा है कि गांव में 2004 में 237 और 2007 में 54 लोगों को एक ही गाटा संख्या पर डबल आवंटन कर दिया गया। यह सारा खेल लेखपाल और भूमाफिया के गठजोड़ का है, जो आम जनता की जमीनों को बेचकर लाखों का खेल खेल रहे हैं।

पीड़ित का दावा है कि जब यह मामला सामने आया तो जिलाधिकारी न्यायालय ने इन फर्जी आवंटनों को निरस्त कर दिया। लेकिन इसके बाद भी कानपुर मंडल के स्पष्ट आदेश के बावजूद भ्रष्ट लेखपाल ने धनउगाही कर गैरकानूनी तरीके से फिर से जमीन बांट दी!

“मुझे धमकियां दी जा रही हैं, दबाव बनाया जा रहा है… लेकिन मैं हार नहीं मानूंगा। मैंने जिलाधिकारी से गुहार लगाई है कि इस भ्रष्ट नेटवर्क को तोड़ा जाए। ये सिर्फ मेरे साथ नहीं, पूरे गांव के साथ अन्याय है।”

बड़े सवाल खड़े:

  • अदालत के आदेश के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

  • लेखपाल के खिलाफ अभी तक विभागीय कार्यवाही क्यों नहीं?

  • क्या प्रशासन की मिलीभगत से हो रहा है यह गोरखधंधा?

इस पूरे मामले की सीबीआई या SIT जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों को सख्त सजा मिले और आम आदमी की ज़मीन सुरक्षित रहे।

अदालत के आदेश को रौंदते हुए लेखपाल ने रची फर्जीवाड़े की साज़िश, पीड़ित ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार

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टेन न्यूज़ !! ०५ जुलाई २०२५ !! प्रभाष चन्द्र ब्यूरो, कन्नौज


उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक सिस्टम पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। उच्च न्यायालय के स्पष्ट स्थगन आदेश के बावजूद एक लेखपाल ने फर्जी तरीके से भूमि का आवंटन कर डाला — और अब पीड़ित दर-दर की ठोकरें खा रहा है, लेकिन न्याय नहीं मिल रहा!

ग्राम सरसई निवासी अनोखेलाल उप प्रधान ने एक विस्फोटक आरोप लगाते हुए कहा है कि गांव में 2004 में 237 और 2007 में 54 लोगों को एक ही गाटा संख्या पर डबल आवंटन कर दिया गया। यह सारा खेल लेखपाल और भूमाफिया के गठजोड़ का है, जो आम जनता की जमीनों को बेचकर लाखों का खेल खेल रहे हैं।

पीड़ित का दावा है कि जब यह मामला सामने आया तो जिलाधिकारी न्यायालय ने इन फर्जी आवंटनों को निरस्त कर दिया। लेकिन इसके बाद भी कानपुर मंडल के स्पष्ट आदेश के बावजूद भ्रष्ट लेखपाल ने धनउगाही कर गैरकानूनी तरीके से फिर से जमीन बांट दी!

“मुझे धमकियां दी जा रही हैं, दबाव बनाया जा रहा है… लेकिन मैं हार नहीं मानूंगा। मैंने जिलाधिकारी से गुहार लगाई है कि इस भ्रष्ट नेटवर्क को तोड़ा जाए। ये सिर्फ मेरे साथ नहीं, पूरे गांव के साथ अन्याय है।”

बड़े सवाल खड़े:

  • अदालत के आदेश के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

  • लेखपाल के खिलाफ अभी तक विभागीय कार्यवाही क्यों नहीं?

  • क्या प्रशासन की मिलीभगत से हो रहा है यह गोरखधंधा?

इस पूरे मामले की सीबीआई या SIT जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों को सख्त सजा मिले और आम आदमी की ज़मीन सुरक्षित रहे।

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