बैंक से ऋण लेने वाले बेरोजगार व गरीब किसान त्रस्त शिकायतें निस्तारण में कर्मचारी सुस्त
बिना दलालों के नहीं होते काम खातेदारों के नॉमिनी कंप्यूटर में नहीं किए जाते अपडेट
टेन न्यूज़ ii 16 अप्रैल 2026 ii ब्यूरो चीफ रामजी पोरवाल
औरैया।* केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार द्वारा किसानों बेरोजगारों व आम लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के दृष्टिगत युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने व किसानों के लिए ऋण उपलब्ध कराने एवं अनुदान दिलाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया जा रहा है किंतु जनपद क्षेत्र के अधिकांश बैंकों के तथाकथित संबंधित कर्मचारियों की मनमानी एवं खाऊ कमाऊं नीति के चलते सरकार की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
खाता खुलवाते वक्त ही नॉमिनी का नाम फॉर्म में भरा जाता है, किंतु संबंधित बैंक कर्मियों द्वारा अधिकांश खातेदारों के नॉमिनी कंप्यूटर में अपडेट नहीं किए जाते हैं,जिससे किसी अनहोनी होने पर नॉमिनी ना होने के कारण उनके वारिसों को बैंक में जमा पैसा हासिल करना काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
अधिकांश बैंकों में दलालों का बोलबाला है बिना दलालों काम होना मुश्किल होता है। शिकायतों के बावजूद संबंधित बैंक कर्मचारी अंजान बने हुए हैं जिससे बैंकों में अव्यवस्थाओं के प्रति लोगों में भारी नाराजगी के साथ आक्रोश पनप रहा है। इससे संबंधित बैंक कर्मियों ने लगाए जा रहे सभी आरोपों को निराधार बताया है।
यूं तो केंद्र व राज्य सरकार द्वारा आम लोगों को युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वरोजगार से जोड़ने व किसानों को भी कृषि कार्य के लिए किसान क्रेडिट आदि विभिन्न माध्यमों से रियायती दर पर ऋण व अनुदान उपलब्ध कराया जाता है लेकिन यह विभिन्न ऋण योजनाएं लाभार्थियों के लिए तो शोषण कराने की मजबूरी बनी हुई है वही यह ऋण योजनाएं अधिकांश बैंक कर्मियों व संबंधित दलालों के लिए कामधेनु साबित होती नजर आ रही हैं।
अधिकांश बैंकों में संबंधित कर्मचारियों की मनमानी एवं आपाधापी का आलम यह है कि उन बैंकों में बिना दलालों के किसान क्रेडिट कार्ड से लेकर विभिन्न ऋण योजनाओं लाभ पाना लोहे के चने चबाने जैसा साबित हो रहा है।
इतना ही नहीं अधिकांश बैंकों में तो जमीनी धरातल पर देखने में यह आ रहा है कि बैंकों के काउंटरों पर यह तथाकथित दलाल बैंक कर्मचारियों की तरह विभिन्न बैंक के काउंटरों पर सरेआम काम करते भी नजर आते हैं और गैर जानकारी में तमाम आम उपभोक्ता इन दलालों को बैंक कर्मी समझ कर उनके साथ बहुत ही नरमी से पेश आते हैं लेकिन बैंक कर्मियों की कृपा पात्र बने यह दलाल सीधे काम करने वाले अधिकांश उपभोक्ताओं पर झिड़कते भी देखे जाते हैं।
बैंक में प्रवेश करते ही यह तथाकथित दलाल लोगों को अपने जाल में फंसा लेते हैं और बाद में किसान क्रेडिट समेत विभिन्न ऋण योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर 12 से 13% तक कमीशन तय कर लेते हैं।
जनचर्चा तो आम यह है कि 10% कमीशन बैंक का ऊपर का कमीशन यह दलाल हड़प लेते हैं।ऋण योजनाओं के नाम पर मनमाना कमीशन वसूले जाने के बावजूद भी लाभार्थियों को महीनों बैंक के चक्कर काटने को मजबूत होना पड़ता है।
अधिकांश बैंक कर्मियों की मनमानी का आलम यह है कि खाता खुलवाते समय ही संबंधित उपभोक्ता के नॉमिनी का नाम फार्म में भरा जाता है किंतु इसके बावजूद बैंक कर्मियों द्वारा नॉमिनी का नाम कंप्यूटर में अपडेट नहीं किया जाता है, जिससे बाद में खातेदार के साथ कोई अनहोनी होने पर उनके वारिसों को बैंक में जमा अपना पैसा हासिल करने में भारी दिक्कतें उठानी पड़ती है।
पीड़ित लोगों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारी शिकायतों का निस्तारण करने के प्रति सुस्त नजर आते रहे हैं।
समस्या से परेशान उपभोक्ताओं ने शासन केंद्रीय वित्त सचिव व बैंकों के संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
हालांकि संबंधित बैंक कर्मियों ने लगाए जा रहे सभी आरोपों को निराधार बताया है।
