टीईटी से नियुक्त शिक्षकों को स्थायी संरक्षण देने की मांग, केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भेजा ज्ञापन![]()
टेन न्यूज ii 19 जून 2026 ii ब्यूरो चीफ: रामजी पोरवाल
औरैया में अखिल राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों तथा उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की तिथि 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
ज्ञापन में 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा जारी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) संबंधी अधिसूचना, आरटीई एक्ट की धारा 23(2) में 9 अगस्त 2017 को किए गए संशोधन तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 एवं पुनर्विचार याचिका में 29 मई 2026 को दिए गए निर्णय के बाद उत्पन्न स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई।
महासंघ ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में वर्ष 2010 से पूर्व तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू नियमों, योग्यता मानदंडों और चयन प्रक्रिया के अनुसार विधिवत एवं वैध रूप से की गई थीं। ऐसे शिक्षकों ने वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
संगठन का कहना है कि बाद में लागू किए गए पात्रता मानदंडों को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के विपरीत है। ज्ञापन में कहा गया कि लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य को अनिश्चितता में डालना शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और शिक्षकों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
महासंघ ने केंद्र सरकार से मांग की कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। साथ ही उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य वैधानिक लाभों को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया जाए।
संगठन ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस और असुरक्षा की स्थिति समाप्त करने की भी मांग की। इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।