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तिलहर चीनी मिल के कैजुअल कर्मचारी भड़के – शोषण के खिलाफ धरना-प्रदर्शन शुरू

By Ten News One Desk

Published on:

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तिलहर चीनी मिल के कैजुअल कर्मचारी भड़के – शोषण के खिलाफ धरना-प्रदर्शन शुरू



टेन न्यूज़ !! ०३ सितम्बर २०२५ !! अमुक सक्सेना, तिलहर (शाहजहांपुर)।


दि किसान सहकारी चीनी मिल तिलहर के समस्त कैजुअल कर्मचारियों ने सोमवार को अपनी जायज़ मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें वर्षों से मिल में काम करने के बावजूद न तो घोषित अवकाश मिल रहा है और न ही ड्रेस दी जा रही है।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि मिल प्रशासन ने कैजुअल कर्मचारियों को “कुशल” और “अकुशल” दो वर्गों में बाँटकर भेदभावपूर्ण रवैया अपना रखा है। वेतन भी मनमर्जी से तय किया जाता है। किसी को ₹265 प्रतिदिन और किसी को ₹300 प्रतिदिन वेतन दिया जा रहा है, जबकि इसके लिए कोई मानक निर्धारित नहीं है।

कर्मचारियों ने बताया कि अगर कोई श्रमिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाता है या उच्च अधिकारियों से गुहार लगाता है तो उसे सेवा से हटा दिया जाता है। इससे कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है।

धरना दे रहे कर्मचारियों ने साफ कहा कि अब “शोषण बर्दाश्त नहीं होगा।” जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनकी प्रमुख मांग है कि “कैजुअल शब्द हटाकर हमें न्यूनतम दैनिक वेतन भोगी का दर्जा दिया जाए, वेतन वृद्धि की जाए और घोषित अवकाश का लाभ मिले।”

धरना स्थल पर कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और उनका कहना है कि अगर जल्द ही चीनी मिल प्रबंधन ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।

तिलहर चीनी मिल के कैजुअल कर्मचारी भड़के – शोषण के खिलाफ धरना-प्रदर्शन शुरू

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टेन न्यूज़ !! ०३ सितम्बर २०२५ !! अमुक सक्सेना, तिलहर (शाहजहांपुर)।


दि किसान सहकारी चीनी मिल तिलहर के समस्त कैजुअल कर्मचारियों ने सोमवार को अपनी जायज़ मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें वर्षों से मिल में काम करने के बावजूद न तो घोषित अवकाश मिल रहा है और न ही ड्रेस दी जा रही है।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि मिल प्रशासन ने कैजुअल कर्मचारियों को “कुशल” और “अकुशल” दो वर्गों में बाँटकर भेदभावपूर्ण रवैया अपना रखा है। वेतन भी मनमर्जी से तय किया जाता है। किसी को ₹265 प्रतिदिन और किसी को ₹300 प्रतिदिन वेतन दिया जा रहा है, जबकि इसके लिए कोई मानक निर्धारित नहीं है।

कर्मचारियों ने बताया कि अगर कोई श्रमिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाता है या उच्च अधिकारियों से गुहार लगाता है तो उसे सेवा से हटा दिया जाता है। इससे कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है।

धरना दे रहे कर्मचारियों ने साफ कहा कि अब “शोषण बर्दाश्त नहीं होगा।” जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनकी प्रमुख मांग है कि “कैजुअल शब्द हटाकर हमें न्यूनतम दैनिक वेतन भोगी का दर्जा दिया जाए, वेतन वृद्धि की जाए और घोषित अवकाश का लाभ मिले।”

धरना स्थल पर कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और उनका कहना है कि अगर जल्द ही चीनी मिल प्रबंधन ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।

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