भू-गर्भ जल संरक्षण जन-जन की जिम्मेदारी, जल बचाना ही भविष्य बचाना है : उप जिलाधिकारी

टेन न्यूज़ !! २१ जुलाई २०२६ !! प्रभाष चन्द्र ब्यूरो, कन्नौज
जिलाधिकारी श्री आशुतोष मोहन अग्निहोत्री के निर्देशन में भू-गर्भ जल सप्ताह-2026 के अंतर्गत राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, कन्नौज में सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा जिला प्रशासन के तत्वावधान में भू-गर्भ जल संरक्षण एवं जन-जागरूकता कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जल संरक्षण के प्रति आमजन, विद्यार्थियों एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जागरूक करते हुए जल संसाधनों के सतत एवं वैज्ञानिक उपयोग का संदेश देना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ आईएएस ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उपजिलाधिकारी सुश्री वैशाली ने दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया। इस अवसर पर सहायक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग श्री रामजी पटेल तथा सिविल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर श्री ऋषभ कश्यप ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।
अपने उद्घाटन संबोधन में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सुश्री वैशाली ने कहा कि वर्तमान समय में भू-गर्भ जल संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है। लगातार गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए जल का विवेकपूर्ण उपयोग, वर्षा जल संचयन तथा प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक एवं सामाजिक दायित्व है। उन्होंने विद्यार्थियों से जल संरक्षण का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने तथा वर्षा जल संचयन को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
कार्यशाला में सहायक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग श्री रामजी पटेल ने भू-गर्भ जल संरक्षण हेतु संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि वर्षा जल का अधिकतम संचयन ही भू-जल स्तर को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी उपाय है।
भू-गर्भ जल विभाग के सहायक अभियंता ने जनपद एवं तहसील स्तर पर भू-जल की वर्तमान स्थिति, उपलब्ध आँकड़ों, जल स्तर में हो रहे परिवर्तनों तथा भू-गर्भ जल अधिनियम-2019 के प्रमुख प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अनियंत्रित भू-जल दोहन पर रोक लगाने तथा जल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण पर विशेष बल दिया।
पी.एस.एम. डिग्री कॉलेज के भूगोल विभागाध्यक्ष ने जनपद की भौगोलिक परिस्थितियों, वर्षा के स्वरूप तथा जल संचयन एवं संरक्षण की वैज्ञानिक तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित एवं सतत उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
उप कृषि निदेशक ने किसानों से सूक्ष्म सिंचाई, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों को अपनाने का आग्रह करते हुए कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीकों के प्रयोग पर जोर दिया।
जल निगम (शहरी/ग्रामीण) के प्रतिनिधि ने हर घर जल मिशन की उपलब्धियों एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी साझा की तथा जल के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश दिया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी के प्रतिनिधि ने जलजनित रोगों से बचाव, स्वच्छ पेयजल के उपयोग एवं स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वच्छ जल स्वस्थ जीवन की आधारशिला है।
कार्यक्रम के समापन पर राष्ट्रीय जल मिशन के अंतर्गत सभी उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई। अंत में संस्थान के निदेशक प्रो. मनोज कुमार शुक्ला ने सभी अतिथियों, अधिकारियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी विभागों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर संस्थान के अधिष्ठाता डॉ. अरुण कुमार सिंह, उपपरीक्षा नियंत्रक डॉ. शिम्पी सिंह जादौन, क्रय अधिकारी राजीव कुमार, अतिथि शिक्षिका करिश्मा, अब्दुल कादिर, धीरज मल अतुल कुमार, श्री सत्यम पाल, श्री देवेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।