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दहेज उत्पीड़न के मामले में पति बरी, अधिवक्ता सुरेश मिश्रा की दलीलों को न्यायालय ने माना प्रभावी

ByTen News One Desk

Jul 9, 2026
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दहेज उत्पीड़न के मामले में पति बरी, अधिवक्ता सुरेश मिश्रा की दलीलों को न्यायालय ने माना प्रभावी


टेन न्यूज़ ii 09 जुलाई 2026 ii ब्यूरो चीफ रामजी पोरवाल

औरैया। दहेज उत्पीड़न के मुकदमे में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में अभियुक्त पति को दोषमुक्त कर दिया है। वर्ष 2023 में दर्ज इस मामले में न्यायालय ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद फैसला सुनाया।

वादिनी ने वर्ष 2023 में अपने पति समेत अन्य ससुरालीजनों के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था।

विवेचना के दौरान पुलिस को पति के अलावा अन्य आरोपित ससुरालीजनों के विरुद्ध कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले, जिसके चलते उनका नाम विवेचक ने पहले ही मुकदमा से निकाल दिया था।

वहीं पति के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।विचारण के दौरान अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता सुरेश मिश्रा ने प्रभावी पैरवी की।

बचाव पक्ष की ओर से की गई जिरह में वादिनी अपने पति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस एवं विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुरेश मिश्रा द्वारा की गई जिरह के दौरान वादिनि ने यह स्वीकार कर लिया कि लोगों के बहकावे में आकर उसने यह मुकदमा लिखाया था।

उसके पति और अन्य ससुरालियों ने उससे कभी भी दहेज की मांग नहीं की थी और न ही उसको दहेज के लिए कभी प्रताड़ित किया गया था।

केश डायरी में शामिल मेडिकल प्रपत्र और उसमें दर्शायी गईं चोटों के बारे में भी वादिनि मुकदमा ने अधिवक्ता सुरेश मिश्रा के सवालों में उलझ गई और अंततः वादिनि ने दौरान जिरह यह स्वीकार किया कि उसके शरीर पर आई चोटें उसके जमीन पर गिरने की थीं न कि पति या ससुरालियों द्वारा मारपीट करने से आई थी।

न्यायालय में अंतिम बहस के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुरेश मिश्रा ने पत्रावली में शामिल तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं पर विस्तृत दलीलें पेश करते हुए यह तर्क रखा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा है।

बचाव पक्ष की दलीलों, अभिलेखों पर उपलब्ध साक्ष्यों तथा दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अभियोजन के आरोप सिद्ध न होने पर अभियुक्त पति को दोषमुक्त करते हुए मुकदमे से बरी करने का आदेश दिया।

फफूंद थाना क्षेत्र में वर्ष 2023 में लिखे गए इस मुकदमे में माननीय न्यायालय द्वारा दोष मुक्त किए जाने के बाद कोर्ट से बाहर निकलते ही निर्दोष पति सत्येंद्र अवस्थी रो पड़ा।

उसने अपने अधिवक्ता सुरेश मिश्रा की इन 3 वर्षों में की गई प्रभावी पैरवी के लिए धन्यवाद दिया।

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