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हज़रत हातिम अली शाह के उर्स के मौक़े पर महफ़िल में प्रख्यात कव्वालों ने अपने सुरों और कलाम से ऐसा समां बाँधा कि श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे

By Ten News One Desk

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हज़रत हातिम अली शाह के उर्स के मौक़े पर महफ़िल में प्रख्यात कव्वालों ने अपने सुरों और कलाम से ऐसा समां बाँधा कि श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे



टेन न्यूज़ !! १८ नवम्बर २०२५ !! अमुक सक्सेना, तिलहर/शाहजहांपुर


तिलहर ,हज़रत हातिम अली शाह के उर्स के मौक़े पर आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत अंतिम दिन कब्बाली महफ़िल ने समूचे क्षेत्र का माहौल आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। देर रात तक चली इस ख़ूबसूरत महफ़िल में प्रख्यात कव्वालों ने अपने सुरों और कलाम से ऐसा समां बाँधा कि श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे।

कार्यक्रम में शमीम वारसी कव्वाल, वसीम वारसी कव्वाल और मुरादाबाद के मशहूर रईस झंकार कव्वाल ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से माहफ़िल को चरम पर पहुँचा दिया। सूफियाना कलाम, मनक़बत और हम्द-नात की पेशकश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को रूहानी सुकून प्रदान किया। कव्वालों ने “मन कुंतोअली मौला”, हातिम शाह का दरबार”अदम से लाई है हस्ती में आरज़ू ए रसूल,जैसे कलाम गाकर लोगों की वाह-वाही लूटी।

हर साल की तरह इस बार भी उर्स का अंतिम दिन पूरी रौनक और चाहत के साथ मनाया गया। दूर-दूर से आए ज़ायरीन ने दुआओं के साथ हज़रत हातिम अली शाह की मज़ार पर हाज़िरी दी और रात भर चली महफ़िल का लुत्फ़ उठाया पूरे आयोजन में आपसी भाईचारा, मोहब्बत और सूफियाना रंग साफ दिखाई दिया। इस मौके पर खान कहे कलीमी के दो असद अहमद कलीमी, रहमानशाह, चांद साबरी, मु, आशिक शाह वारसी देवा, तमन्ना शाह वारसी, क़ासिम वारसी, करम शाह वारसी, सूफी चांद मियां, राहतुल्ला खान, आदि मौजूद रहे अंत में से सज्जादा नशीन इकबाल हुसैन उर्फ फूल मियां ने सभी का शुक्रिया अदा किया और कार्यक्रम समापन का ऐलान किया

हज़रत हातिम अली शाह के उर्स के मौक़े पर महफ़िल में प्रख्यात कव्वालों ने अपने सुरों और कलाम से ऐसा समां बाँधा कि श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे

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हज़रत हातिम अली शाह के उर्स के मौक़े पर महफ़िल में प्रख्यात कव्वालों ने अपने सुरों और कलाम से ऐसा समां बाँधा कि श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे



टेन न्यूज़ !! १८ नवम्बर २०२५ !! अमुक सक्सेना, तिलहर/शाहजहांपुर


तिलहर ,हज़रत हातिम अली शाह के उर्स के मौक़े पर आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत अंतिम दिन कब्बाली महफ़िल ने समूचे क्षेत्र का माहौल आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। देर रात तक चली इस ख़ूबसूरत महफ़िल में प्रख्यात कव्वालों ने अपने सुरों और कलाम से ऐसा समां बाँधा कि श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे।

कार्यक्रम में शमीम वारसी कव्वाल, वसीम वारसी कव्वाल और मुरादाबाद के मशहूर रईस झंकार कव्वाल ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से माहफ़िल को चरम पर पहुँचा दिया। सूफियाना कलाम, मनक़बत और हम्द-नात की पेशकश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को रूहानी सुकून प्रदान किया। कव्वालों ने “मन कुंतोअली मौला”, हातिम शाह का दरबार”अदम से लाई है हस्ती में आरज़ू ए रसूल,जैसे कलाम गाकर लोगों की वाह-वाही लूटी।

हर साल की तरह इस बार भी उर्स का अंतिम दिन पूरी रौनक और चाहत के साथ मनाया गया। दूर-दूर से आए ज़ायरीन ने दुआओं के साथ हज़रत हातिम अली शाह की मज़ार पर हाज़िरी दी और रात भर चली महफ़िल का लुत्फ़ उठाया पूरे आयोजन में आपसी भाईचारा, मोहब्बत और सूफियाना रंग साफ दिखाई दिया। इस मौके पर खान कहे कलीमी के दो असद अहमद कलीमी, रहमानशाह, चांद साबरी, मु, आशिक शाह वारसी देवा, तमन्ना शाह वारसी, क़ासिम वारसी, करम शाह वारसी, सूफी चांद मियां, राहतुल्ला खान, आदि मौजूद रहे अंत में से सज्जादा नशीन इकबाल हुसैन उर्फ फूल मियां ने सभी का शुक्रिया अदा किया और कार्यक्रम समापन का ऐलान किया

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