बेमौसम बारिश बनी किसानों की मुसीबत, प्रकृति से छेड़छाड़ का खामियाजा भुगत रहा किसान![]()
टेन न्यूज़ ।। 26 सितम्बर 2026 ।। अमुक सक्सेना
तिलहर/शाहजहांपुर। बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी फसलों पर लगातार बारिश और जलभराव का असर दिखाई देने लगा है। किसान महीनों की मेहनत और अपनी पूंजी लगाने के बाद फसल तैयार करता है, लेकिन प्राकृतिक आपदा उसकी मेहनत पर पानी फेर देती है।
आधुनिक विकास की दौड़ में जंगलों की कटाई, पहाड़ों की खुदाई, नदियों और तालाबों के स्वरूप में बदलाव तथा बढ़ता प्रदूषण पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं। इसका असर अब खेती-किसानी पर भी दिखाई देने लगा है। विडंबना यह है कि इन गतिविधियों में किसानों की भूमिका बेहद कम होती है, लेकिन प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने पर सबसे अधिक नुकसान किसान को ही उठाना पड़ता है।
कभी अतिवृष्टि, कभी जलभराव और कभी सूखे जैसी परिस्थितियां किसानों के सामने लगातार चुनौती बनकर खड़ी रहती हैं। फसल तैयार होने के बाद बाजार में भी किसानों को बढ़ती लागत, उचित मूल्य और बिक्री से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
किसानों को राहत देने के लिए समय पर खाद और बीज की उपलब्धता, फसल का उचित मूल्य तथा प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा के प्रभावी इंतजाम जरूरी हैं। प्रकृति और जलस्रोतों के संरक्षण के साथ ऐसा विकास आवश्यक है, जिसमें किसान की जमीन, फसल और आजीविका सुरक्षित रह सके।