ढेकियाजुली “आपकू” का प्रथम स्थापना दिवस एवं वार्षिक आम सभा संपन्न, वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार ललित बरुआ स्मृति व्याख्यान का आयोजन

टेन न्यूज़ !! २८ जून २०२६ !! प्रशांत बैश्य ब्यूरो, सोनितपुर (असम)
ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों के पत्रकार ही समाचार जगत की वास्तविक रीढ़ हैं। असम की गौरवशाली पत्रकारिता के इतिहास में उनके त्याग, समर्पण और अथक परिश्रम का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए गठित संगठन असम प्रेस कॉरेस्पोंडेंट्स यूनियन (आपकू) की ढेकियाजुली उप-जिला समिति का प्रथम स्थापना दिवस एवं वार्षिक आम सभा बुधवार को ढेकियाजुली स्थित शहीद उद्यान सभागार में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ आयोजित किया गया।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार स्वर्गीय ललित बरुआ की स्मृति में एक व्याख्यान कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। प्रातः 10 बजे ढेकियाजुली आपकू के अध्यक्ष सुजीत कटकी ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद संगठन के संस्थापक अध्यक्ष भवेश शइकिया एवं प्रधान सचिव भवेश बरुआ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यकारी अध्यक्ष तपन सेनगुप्ता ने दीप प्रज्वलित किया, जबकि सचिव कल्पज्योति नाथ ने मुख्य तर्पणकर्ता के रूप में भाग लिया।इसके पश्चात 1942 के शहीद स्मारक पर सेवानिवृत्त शिक्षक बिधु भूषण राय ने दीप प्रज्वलित कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।स्मृति व्याख्यान में “समाचार, पत्रकारिता और समाचार पत्रों की रोशनी में असमिया साहित्य” विषय पर अमार असम समाचारपत्र के वरिष्ठ उप-संपादक रबीन भूঞा ने प्रभावशाली व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि समाज के लिए समर्पित व्यक्तित्व कभी समय के साथ भुलाए नहीं जाते।
स्वर्गीय ललित बरुआ ऐसे ही प्रेरणादायी व्यक्तित्व थे, जिनका समाज के प्रति योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।उन्होंने वर्तमान पत्रकारिता की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज केवल मोबाइल फोन हाथ में होने से लोग स्वयं को पत्रकार समझने लगे हैं। वास्तविक पत्रकारिता केवल समाचार प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज निर्माण, सत्य की स्थापना और जनहित की रक्षा भी पत्रकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने असामाजिक और अनैतिक पत्रकारिता के विरुद्ध जनता से जागरूक रहने का भी आह्वान किया।उन्होंने आगे कहा कि असमिया भाषा, साहित्य और राष्ट्रीय चेतना के विकास में समाचार पत्रों और साहित्यिक पत्रिकाओं की ऐतिहासिक भूमिका रही है। भाषा, संस्कृति और समाज की रक्षा केवल सरकार या संगठनों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक जागरूक नागरिक का भी कर्तव्य है।कार्यक्रम में स्थानीय विधायक एवं असम सरकार के कैबिनेट मंत्री अशोक सिंघल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने पत्रकारिता की रचनात्मक भूमिका, सकारात्मक एवं नकारात्मक समाचारों के प्रभाव तथा पत्रकारों के दायित्वों पर अपने विचार व्यक्त किए।
विशिष्ट अतिथि के रूप में आपकू के केंद्रीय मुख्य सलाहकार अब्दुल खालेक तथा असम राष्ट्रीयतावादी युवा-छात्र परिषद के केंद्रीय मुख्य सलाहकार राणा प्रताप बरुआ ने शुभकामनापूर्ण संबोधन दिया।कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पत्रकार रमेश चंद्र बोरा एवं भोलानाथ नाथ को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। वहीं नरेंद्र नाथ हलै, रंजन ज्योति शर्मा तथा मृदुल कुमार डेका के मधुर गीतों ने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया।
इस अवसर पर धरणी केवट, बगीराम बड़ो, काजल बोरा, ईश्वर गोपाल कृष्ण राभा, भुवन दास, उमेश चंद्र दास, प्रफुल्ल चंद्र दास, रोहिणी केवट, नंदलाल दास, नगेन चंद्र बैश्य, दिलीप सेनापति, पलिमा बी. चेतिया सहित विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।सायं 4 बजे अध्यक्ष सुजीत कटकी की अध्यक्षता में वार्षिक आम सभा आयोजित हुई, जिसका उद्घाटन उदालगुड़ी जिला आपकू के अध्यक्ष नव कुमार डेका ने किया। सचिव कल्पज्योति नाथ ने संगठन की वार्षिक रिपोर्ट, पिछली बैठक की कार्यवाही तथा संगठन के उद्देश्य प्रस्तुत किए।
सभा के दौरान कार्यकारी अध्यक्ष तपन सेनगुप्ता, उपाध्यक्ष चनी दैमारी एवं पंकज देव, सचिव कल्पज्योति नाथ, सहायक सचिव भास्कर लहकर, पत्रिका संपादक संजय बरुआ, कोषाध्यक्ष पंकज महतो, सदस्य गणेश डेका तथा अध्यक्ष सुजीत कटकी को गमोसा एवं सम्मान-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
अंत में संगठनात्मक विषयों पर विस्तृत चर्चा के बाद कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए तथा आगामी वर्ष के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर उसी के अनुसार संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।